जमीन के अभाव में 72 पेयजल परियोजनाएं अटकीं
देवरिया। पेयजल परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में जमीन की कमी रोड़ा बन रही है। जिले के 72 गांवों में पेयजल परियोजना के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। शासन ने अनुसूचित जाति, जनजाति बहुल व जेई-एईएस से प्रभावित 685 गांवों में जल जीवन मिशन योजना के तहत पेयजल परियोजना के लिए आगणन मांगा है। इनमें 613 गांवों में ही जमीन उपलब्ध हो पाई है। बाकी जगहों पर जिला प्रशासन कई माह से जमीन की तलाश में जुटा है।
पेयजल परियोजनाओं का आगणन तैयार करने की जिम्मेदारी शासन ने दो प्राइवेट कंपनियों को सौंपी है। मेसर्स एलसी इंफ्रा और मेसर्स गायत्री प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड जल जीवन मिशन के तहत प्रस्तावित गांवों में पेयजल परियोजना के लिए आगणन बना रही हैं। अबतक 101 गांवों का आगणन तैयार हो चुका है। कंपनी के बनाए आगणन का तकनीकी सत्यापन जल निगम के इंजीनियर कर रहे हैं। प्रस्तावित गांवों के आगणन सितंबर माह से पहले शासन को भेज दिया जाएगा।
2024 तक सभी गांवों को मिलेगा पेयजल
सरकार की मंशा वर्ष 2024 तक सभी गांवों को पेयजल मुहैया कराने की है। जिले की 1185 ग्राम पंचायतों में अब तक 160 गांवों में पेयजल परियोजनाएं चालू की गई हैं। वर्तमान समय में 65 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। जल जीवन मिशन के तहत 685 गांवों में पेयजल परियोजना चालू होने के बाद सिर्फ 275 गांवों को पेयजल की दरकार होगी। इन्हें भी वर्ष 2024 तक संतृप्त कर दिया जाएगा।
जल जीवन मिशन के तहत 685 गांवों में पेयजल परियोजना लगाने के लिए आगणन तैयार किए जा रहे हैं। अक्तूबर से पहले तकनीकी सत्यापन कर आगणन शासन को भेज दिया जाएगा। सरकार की मंशा वर्ष 2024 तक सभी गांवों को पेयजल मुहैया कराने की है। -प्रदीप चौरसिया, एक्सईएन, जल निगम