चित्रकूट/मानिकपुर। जिले के साथ ही पहाड़ों व मप्र क्षेत्र में हो रही बारिश से बाढ़ के हालात खतरनाक होते जा रहे हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी 140 मीटर की ऊंचाई से बह रही है। यूपी एमपी को जोड़ने वाले पुल पर मंदाकिनी की लहरों का पानी छूने लगा है।
बाढ़ को देखकर सन 2003 वाली बाढ़ की याद आ जाती है जब अडगडा नाले में हाथी डूब गया था। रविवार को भी अडगडा नाला ऊफान पर है और लगभग सात मीटर ऊंचाई पर पानी बह रहा है। मप्र टूरिस्ट बंगला, बैंक परिसर में पानी भर गया है। सतना जिले के कई बांध उफनाने से फाटक खोलने से चित्रकूट में पानी बढ़ता जा रहा है। मानिकपुर के ऊंचाडीह सकरौंहा आदि गांव के लोग बाढ़ में फंस गए हैं। तरौंहा के कई घरों में जलभराव है। जिससे गरीब परिवारों के सामने भूखे पेट होते हुए जान बचाने की लगी है। इन तीनों स्थानों पर कुल मिलाकर लगभग 50 हजार की आबादी पानी में घिरी है। एडीएम जीपी सिंह, एसडीएम पूजा यादव, सीओ शीतला प्रसाद, तहसीलदार संजय अग्रहरि, कोतवाल वीरेंद्र त्रिपाठी देर शाम तक मंदाकिनी किनारे डटे रहे। इसी दौरान बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन ने दो राहत कैंप संचालित किए हैं। रैन बसेरा व पोद्दार इंटर कालेज को राहत शिविर बनाकर बाहरी व स्थानीय लोगों के ठहरने व भोजन का इंतजाम किया गया है। इसी प्रकार मानिकपुर में भी एसडीएम ने राहत शिविर संचालित करा दिया है। उधर, मऊ व राजापुर में यमुना नदी का भी जलस्तर बढ़ रहा है। जिसे देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान कर दिया गया है। इन इलाकों के कई गांव में बारिश का पानी घरों में घुस गया है।