चित्रकूट। राष्ट्रीय लोक अदालत में 4,608 मुकदमों का निस्तारण किया गया। खासकर बैंक व दुर्घटना संबधित मामलों का ज्यादा निस्तारण कराया गया।
शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद न्यायाधीश रवीन्द्र नाथ दुबे की अध्यक्षता में किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव विदुषी मेहा ने बताया कि परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामकृपाल ने 18 वादों का निस्तारण करते हुए 2,19,600 रुपये प्रतिकर दिलाया, मोटर दुर्घटना दावा के18 मामलों को निस्तारण करते हुए 69,81,109 रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाया। 51 विद्युत वादों का निस्तारण हुआ।
584 फौजदारी मामलों का निस्तारण करते हुए तीन लाख 96 हजार 100 रुपये अर्थदंड वसूला और 9 एनआई एक्ट के मामलों का निस्तारण किया। 40 फौजदारी वादों का निस्तारण करते हुए 800 रुपये जुर्माना वसूला और एक एनआई एक्ट के वाद का निस्तारण कर दो लाख रुपये परिवादी को दिलाए। चार सिविल वादों का निस्तारण करते हुए 24 लाख 38 हजार 559 रुपये का उत्तराधिकारी का प्रमाण पत्र जारी किया गया और तीन मूल वाद का निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर किया गया। सिविल जज (सीडि) एफटीसी प्रवीण कुमार ने 93 फौजदारी वादों का निस्तारण करते हुए 15 हजार 400 रुपये अर्थदंड वसूला। सिविल जज (जूडि) वसुन्धरा शर्मा द्वारा छह सिविल वाद निस्तारित करते हुए 63 हजार 557 रुपये सेटेलमेंट हुआ व सात फौजदारी वादों का निस्तारण करते हुए 10 हजार 100 रुपये अर्थदंड वसूला गया। मऊ मेें 103 फौजदारी वाद निस्तारित कर 22 हजार 600 रुपये अर्थदंड और मानिकपुर मेें 90 फौजदारी वादों का निस्तारण करते हुए 2,495 रुपये अर्थदंड वसूल किया।
सचिव ने बताया कि राजस्व न्यायालयों द्वारा 2,893 वादों का निस्तारण करते हुए एक लाख 23 हजार 052 रुपये वसूल किए गए। इसी प्रकार सभी बैंकों द्वारा 455 वादों का निस्तारण करते हुए 35 करोड़ 89 लाख रुपये आपसी सुलह-समझौते के आधार पर वसूल किए गए। साथ ही अन्य प्रकार के 223 वाद निस्तारण में 1,83,900 रुपये वसूल किए गए।