जिले के कई विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश में छत से पानी टपकता रहता है। दीवारों में दरारें हैं, छत से टूटी पटिया लटक रही है। ऐसे में जान हथेली पर रखकर बच्चे पढ़ाई करने को विवश हैं। यह आलम तब है जब मिशन कायाकल्प के तहत स्कूलों को हाईटेक और मॉडर्न बनाने का दावा किया जा रहा है।
जिले के कई सरकारी स्कूल वर्षों पुराने हैं। रख-रखाव के अभाव में इन स्कूलों के भवन व छत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं। कई की चहारदीवारी भी गायब है। इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे जान जोखिम में रखकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिले के 1185 परिषदीय स्कूलों में कुछ को छोड़कर बाकी लगभग सभी संसाधनों का अभाव झेल रहे हैं। कई स्कूलों में कमरों की दीवारों पर दरार पड़ गई है। कई में छत पर लगी सीलिंग टूटकर लटक रही है। कई के छत क्षतिग्रस्त हैं जिससे कमरों में बारिश का पानी टपकता है। बेसिक शिक्षा विभाग एक ओर स्कूलों के मिशन कायाकल्प में सुधार का दावा कर रहा है तो वहीं जमीनी हकीकत कुछ और है।
स्कूल की दीवार में दरार, छत से लटकी पटिया
धीना। बरहनी विकास खंड के भैंसाखुर्द गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। स्कूल के कमरों की दीवारों पर दरारें पड़ गईं हैं। वहीं जर्जर छत से आधी टूटी पटिया लटक रही है। स्कूल की छत कब गिर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। प्रधानाध्यापक रणविजय सिंह ने बताया कि बारिश में सभी कमरों से पानी टपकने लगता है। बताया कि इसकी सूचना बीईओ बरहनी सहित बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान व विधायक को कई बार दी जा चुकी है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया है। बीईओ बरहनी कन्हैयालाल ने बताया कि उनका तबादला हो चुका है। वहीं नए बीईओ ने चार्ज नहीं संभाला है। इसलिए वे कुछ नहीं कह सकते।
दीवारों की दरारों में रेंगते सांप व बिच्छू
धीना। भैंसाखुर्द गांव के सरकारी स्कूल में कमरों की दीवारों की दरारों में सांप व बिच्छू रेंगते रहते हैं। सुबह विद्यालय के कमरों को खोलने के बाद अच्छी तरह सावधानी से जांच करनी पड़ती है कि सांप-बिच्छू न दिख जाएं। सांपों व बिच्छुओं को मारने व भगाने के लिए सभी कमरों में मजबूत डंडा रखा गया है।
स्कूल की जर्जर छत से गिरते रहते हैं चपड़े
चहनिया विकासखंड के रानेपुर के प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो गया है। जर्जर छत से चपड़े व ईंट के टुकड़े टूटकर गिरते हैं। विवशता में बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को विवश हैं। ग्राम प्रधान के बीएसए व बीईओ को लिखित सूचना देने के बावजूद मरम्मत नहीं कराया जा रहा है।
गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय का निर्माण 1995-96 में हुआ था। रख-रखाव के अभाव में स्कूल का भवन पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है। इस संबंध में ग्राम प्रधान अवधेश कुमार ने बताया कि बीएसए व एबीएसए को जर्जर विद्यालय की स्थिति से अवगत कराते हुए लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया है।
जर्जर कमरे को कर दिया गया है बंद
नियामताबाद। विकास खंड क्षेत्र के नरैना गांव के प्राथमिक विद्यालय में एक कमरे की दीवार पर दरार पड़ गई है। किसी अनहोनी की आशंका से बचने के लिए कमरे को बंद कर दिया गया है। अब इस कमरे मे बच्चे नहीं पढ़ते हैं। इस कमरे में पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे कमरे में पढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में ग्राम प्रधान गुलाब बिंद ने कहा कि कमरे की स्थिति से बीईओ को अवगत करा दिया गया है।
परिषदीय स्कूलों के भवनों की रिपोर्ट बनाने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभाग के एई इसके सदस्य बनाए गए हैं। कमेटी की रिपोर्ट पर स्कूलों में मरम्मत कार्य कराया जाता है। रिपोर्ट आने के बाद मरम्मत करायी जाएगी। - मोहसिन अहमद, डीसी, बीएसए।