क्षेत्र के अमड़ा गांव में आजादी के समय से एक दिवसीय रामलीला की परंपरा आज भी कायम है। अमड़ा के एकदिवसीय रामलीला की विशेषता गांव के सभी जाति धर्म के लोगों का शामिल होना है। पुरखे पुरनियों-द्वारा चलाई गई इस परंपरा का निर्वहन गांव के युवा बड़े बुजुर्गों के निर्देशन में आज भी जारी रखे हुए हैं।
बरहनी विकास खंड के अमड़ा गांव में आजादी के समय से आज तक हर वर्ष दीपावली के अगले दिन एकदिवसीय रामलीला का मंचन होता चला आ रहा है। इस रामलीला में हर वर्ष धनुषयज्ञ एवं परशुराम-लक्ष्मण संवाद का ही मंचन किया जाता है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जब भी प्रसंग बदलने की बात हुई तब - तब रामलीला पर संकट के बादल छाने लगते हैं। गांव के बब्बन सिंह ने बताया कि जब भी प्रसंग बदलने की योजना बनाई गयी राम लीला बंद होते होते बची है। इसके चलते हर वर्ष धनुष यज्ञ व परशुराम - लक्ष्मण संवाद का ही मंचन किया जाता है। समिति के डॉ. समर बहादुर सिंह ने बताया कि इस वर्ष दीपावली के अगले दिन धनुष यज्ञ व परशुराम- लक्ष्मण संवाद और उसके बाद चार दिन तक विभिन्न नाटकों का मंचन गांव के युवाओं द्वारा किया जाएगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।