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कारगिल में शहीद जवान को आज तक नहीं मिल पाया सम्मान

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धीना। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ते हुए मात्र 32 वर्ष की उम्र में अपनी जान गंवाने वाले बरहनी ब्लॉक के बोहरा चंदेल गांव निवासी शहीद अब्दुल खालिक अंसारी को आज तक वो सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। आलम यह है कि गांव के दो-चार बुजुर्गो को छोड़ दें तो युवाओं नहीं पता कि उनके गांव का कोई लाल कारगिल युद्ध में शहीद हुआ था। इससे अमर शहीद का नाम अब गुमनामी के कगार पर है। खालिद के शहीद होने पर गांव पहुंचे नेताओं ने उनके नाम पर स्मृति द्वार सहित तमाम काम कराने का वादा किया था। लेकिन समय के साथ सभी अपने वादे को भूल चुकें है। परिवार की मदद, स्मारक, स्मृति स्थल तो दूर आज तक गांव में शहीद के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई।
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बरहनी ब्लॉक के बोहरा चंदेल निवासी अब्दुल खालिक अंसारी के पिता मो. शरीफ अंसारी ने बताया कि खालिक 1988 में मुंबई इंजीनियरिंग ग्रुप में सेना में भर्ती हुए थे। वर्ष 1999 में भारत पाक के बीच हुए कारगिल युद्ध में लांस नायक के पद पर तैनात खलिक शहीद हुए थे। जब उनका जनाजा गांव आया तो कई अधिकारी के साथ नेता भी गांव पहुंचे थे। सबने परिवार को ढांढस बंधाने के साथ शहीद के नाम पर गांव में स्मारक, स्मृति द्वार और सड़क बनवाने का वादा किए थे। समय के साथ सभी अपने वादे को भूल गए।
पिता शरीफ अंसारी के साथ परिवार के सदस्य इससे मर्माहत है। खलिक की शहादत को याद कर परिवार के लोगों के आंसू आज भी नहीं सूखें है। आलम यह है कि जिला तो दूर गांव के लोग भी शहीद का नाम भूल चुके हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब अमर उजाला की टीम शहीद के गांव जानकारी के लिए पहुंची तो कई युवाओं ने बताया कि इस गांव से कोई कारगिल में शहीद नहीं हुआ है। लेकिन बाद में गांव के बुजुर्गों ने शहीद के बारे में बताकर उनके परिवार का नंबर उपलब्ध कराया। शहीद के पिता ने बताया कि उस समय सरकार की तरफ से जो पैसा मिला था, उन्हें लेकर उनकी विधवा मायके चली गई, और तब से अब तक वहीं हैं। पिता ने बताया कि वे भी काम धंधे के संदर्भ में पूना रहते हैं।
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कंदवा। शहीद अब्दुल खालिक अंसारी तीन भाईयों में सबसे बड़े थे। उनके दूसरे नंबर के भाई अब्दुल सलीम अंसारी बॉडी बिल्डर हैं। वे वर्ष 2011 में चैंपियन ऑफ चैम्पियन,2012 में एशिया चैंपियन और 2012,13 और 14 में बॉडीबिल्डिंग में विश्व चैंपियन रह चुके हैं। अब वे पुणे में जिम चलाते हैं। जबकि सबसे छोटे अब्दुल वारिस अंसारी प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। परिवार के 6 -7 लोग अभी भी सेना में तैनात हैं।
धीना। शहीद खालिक अंसारी के पिता शरीफ अंसारी ने बताया कि सपा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू ने गांव में आकर आश्वासन दिया था कि शहीद के नाम पर गांव में स्मारक और स्मृति द्वार बनवाया जाएगा पर आज तक कुछ भी नहीं हो सका है।
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