पीडीडीयू नगर। जनपद के लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए नगरीय व ग्रामीण इलाकों में जलनिगम की ओर से पानी की टंकियां बनाई गई हैं। इन टंकियों में पानी ट्यूबवेल के माध्यम से चढ़ाने के बाद पाइप लाइन के जरिए घरों में पानी पहुंचाया जाता है। जलनिगम पर हर छह माह पर पानी के टंकियों की सफाई कराने की जिम्मेदारी है। इसके लिए शासन से अतिरिक्त धन न मिलने से जलनिगम को टंकियों की सफाई कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जलकर के रूप में मिले धन से ही टंकियों की सफाई करानी पड़ती है।
जिले में पानी की कुल 42 टंकियां हैं। इनमें 17 टंकियों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर है जबकि शेष 25 की सफाई जलनिगम कराता है। जलकर के रूप में प्राप्त धन से टंकियों की सफाई कराई जाती है। टंकियों में पानी चढ़ाने के लिए लगाए गए नलकूपों पर नियुक्त ऑपरेटर व कुछ मजदूरों की सहायता से टंकियों की सफाई कराई जाती है। छोटी टंकियों की सफाई कराने में करीब तीन हजार और बड़ी टंकियों की सफाई कराने में छह हजार रुपये का खर्च आता है। जलकर के रूप में धन प्राप्त न होने पर मेंटेनेंस के लिए खर्च किए जाने वाले धन से टंकियों की हर छह माह पर सफाई कराई जाती है।
पानी की इन टंकियों की सफाई कराने के साथ उसमें दवा भी मिलाई जाती है ।अमूमन टंकियों में मशीन के जरिए हाइड्रोक्लोराइड नाम की दवा मिलाई जाती है। इस दवा के प्रभाव से पानी में मिले घातक विषाणु नष्ट हो जाते हैं। पानी को पहले ट्यूबवेल के माध्यम से टंकियों में चढ़ाया जाता है। इसके बाद मशीन के जरिए उसमें दवा मिलाने के बाद पाइप के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है।
जिले की सभी टंकियों की नियमित रूप से हर छह माह के अंतराल पर साफ-सफाई कराई जाती है। साथ ही लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर दवा का मिश्रण किया जाता है। जिन टंकियों में ट्यूबवेल से पानी के साथ बालू भी चढ़ जाता है, उनकी सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। बलवंत प्रसाद, सहायक अभियंता, जलनिगम