चकिया। चकिया के प्रमुख सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में विख्यात ऐतिहासिक लतीफ शाह मेले पर लगातार दूसरे वर्ष कोरोना महामारी का ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। इसके पहले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तीन वर्षों तक मेला नहीं लगा था। इस वर्ष भी लतीफशाह मेले के आयोजन को लेकर अब तक स्थानीय प्रशासन की ओर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं हुआ है। इससे लोगों में मायूसी है। वहीं चर्चा है कि बाबा लतीफशाह की मजार की जियारत की अनुमति कोरोना गाईड लाइन के तहत दी जा सकती है, लेकिन कजरी महोत्सव एवं बरहुआं, सोनहुल, चकिया तथा सिकन्दरपुर में आयोजित होने वाले विराट कुश्ती दंगल के आयोजन पर ग्रहण लगना तय माना जा रहा है।
वर्ष 1793-94 में बाबा की मजार के निर्माण के साथ ही तत्कालीन काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह ने लतीफशाह मेले के आयोजन की आधारशिला रखी थी। हरतालिका तीज के तीसरे दिन बाबा की मजार पर मेला लगता है। कहा जाता है कि यह देश की पहली मजार है जहाँ हिन्दू तिथि के आधार पर मेला लगता है। इस मेले पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1939 से 1945 के बीच तीन वर्ष रोक लगाई गयी थी। इसके बाद वर्ष 2020 तथा 2021 में कोरोना महामारी के चलते मेला का कार्यक्रम स्थगित किया गया है। 110 वर्षो से लतीफशाह मेले के दूसरे दिन चकिया उपजिलाधिकारी आवास परिसर में वट वृक्ष के नीचे आयोजित होने वाला कजरी महोत्सव भी इस वर्ष नहीं आयोजित हो सकेगा। वही मेले के अवसर पर बरहुंआ, सोनहुल, चकिया तथा सिकन्दरपुर के विराट कुश्ती दंगलो की भी अनुमति अब तक प्रशासन द्वारा नही मिली है। उपजिलाधिकारी प्रेमप्रकाश मीणा ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के कारण मेले को अनुमति देना संभव नहीं है, लेकिन कोरोना गाईड लाईन के तहत मजार पर जियारत की अनुमति दी जायेगी।