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स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण ही लड़कियों को बढ़ाएगा आगे

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पीडीडीयू नगर। राष्ट्रीय बालिका दिवस देश में हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2008 में की थी। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिनका उद्देश्य बालिकाओं के लिए स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाने सहित उनको जागरूक करना है।
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24 जनवरी को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभाल संभाला था। उस दिन की याद में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस को लेकर किशोरियों व युवतियों में उत्साह व उत्सुकता रहती है। समाज में पुरुषों से बराबरी को लेकर बालिकाओं में हमेशा जागरूकता रहती है। उन्हें बालिकाओं के प्रति भेदभाव को लेकर रोष भी रहता है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष किए जाने का उन्होंने स्वागत भी किया है। बातचीत में युवतियों व छात्राओं ने दिवस को लेकर अपनी राय इस प्रकार प्रकट की।
सुभाष नगर निवासी छात्रा नेहा यादव ने कहा कि अभी भी देश में नारी शक्ति को वह अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है जिसकी वे हकदार हैं। राजस्थान जैसे राज्यों में आज भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं। सरकारों को इस प्रवृत्ति पर रोक लगाना चाहिए।
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सुभाष नगर निवासी छात्रा शशि का कहना है कि सुरक्षा देश में लड़कियों की सबसे बड़ी समस्या है। वे रात को घर से निकलने में डरती हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य तभी सफल होगा जब उनके मन से इस प्रकार का भय निकल सकेगा।
विकासनगर निवासी रेलकर्मी अमृता ने कहा कि सरकार की ओर से लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष किया जाना उचित कदम है। इससे उनमें शादी के पहले सोचने समझने की शक्ति का विकास होगा। साथ ही बाल विवाह रोकने की दिशा में यह कारगर कदम साबित होगा।
प्लांट डिपो निवासी छात्रा पूनम तूरी ने कहा कि स्कूल व कॉलेज आने व जाने के दौरान लड़कियों में सुरक्षा का भाव होना चाहिए। केवल राष्ट्रीय बालिका दिवस की खानापूर्ति करने से ऐसा नहीं होगा। लड़कियों की सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
मुगलसराय निवासी सेवानिवृत्त रेलकर्मी तनवीर आलम की बेटी हुमा तनवीर ने एशिया टॉप 100 इन्फ्लुएशियल वूमेन अवार्ड 2021 से सम्मानित होकर माता-पिता सहित नगर व जिले का नाम रौशन किया है। हुमा की छह किताबें अंतराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इंग्लैंड और जर्मनी में प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही उनकी सातवीं किताब पिछले वर्ष देश में प्रकाशित हुई है। हुमा वर्तमान में अपनी आठवीं किताब लिख रही हैं जो ऐतिहासिक महाकाव्य से प्रेरित एक थ्रिलर है। उनका कहना है कि देश में बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके अधिकारों में बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए। अपनी सफलता का श्रेय वे अपने परिजनों व सहपाठियों को देती हैं।
पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू की तीन संतानों में शिरिषा सबसे छोटी हैं। शिरिषा ने हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक में इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण करने के बाद पायलट की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग के बाद उसका सेलेक्शन महिला पायलट के पद पर हुआ है। शिरिषा ने लड़कियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि लड़कियों को अपनी मंजिल खुद तय करनी होगी। इसी आधार पर लक्ष्य का पीछा करना होगा। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता नीलू व पिता के साथ भाई व बहन को दिया। साथ ही दादा रामअवध सिंह को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनके निर्देशन में ही वे आगे बढ़ सकी हैं। बेटी की सफलता पर पूरा जनपद गौरवान्वित है।
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