जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज सीनियर डिवीजन विभांशु सुधीर मंगलवार को पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने आजादी के 75वें वर्षगांठ पर आयोजित अमृत महोत्सव के संदर्भ में विधिक जागरूकता शिविर के बारे में जानकारी दी। बताया कि दो अक्टूबर से लेकर 14 नवंबर तक विविध कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से आयोजित होंगे।
इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी इंद्रावती यादव की अध्यक्षता में जागरूकता शिविर आयोजित हुआ, जिसमें महिलाओं को कानूनी अधिकार के बारे में बताया गया। बताया कि समान वेतन का अधिकार में पारिश्रमिक अधिनियम के तहत वेतन या मजदूरी को लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता। काम के दौरान हुए उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है। गोपनीयता की रक्षा के लिए यौन उत्पीड़न की शिकायत पीडि़ता अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है। इस दौरान महिलाओं को घरेलू हिंसा, लिव इन रिलेशन, आदि के कानून के बारे में बताया गया। दीक्षा अग्रहरी ने महिलाओं को मातृत्व संबंधी लाभ और अधिकार, के बारे में बताया। बोली प्रसव के बाद महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जा सकती। बताई कि महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। लेकिन विशेष परिस्थिति में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश पर यह संभव है।