कंदवा कथा के श्रवण से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। कलयुग में कथा अमृत के समान है, जिसके श्रवण करने से मनुष्य भवसागर से पार उतर जाता है। कथा मनुष्य को अच्छे संस्कार सिखाती है। जीवन कैसे जीना है, किनका सम्मान करना है, किसकी सेवा से मनुष्य समाज में सम्माननीय बन जाता है, यह सब सूत्र कथा ही सिखाती है।
उक्त बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के दौरान सोमवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदर राज जी महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि नारायण के नाम और कथा के श्रवण से कई जन्मों के पाप का नाश हो जाता है। कहा कि कथा में मानव जीवन का पूरा सार समाहित है। कहा कि कलयुग में मांस-मदिरा का प्रचलन काफी बढ़ गया है। उसका परित्याग उतना ही फायदेमंद है जितना नारायण का नाम लेना है। उन्होंने युवाओं से मांस-मदिरा का सेवन छोड़ने का भी आह्वान किया। इस दौरान मृत्युंजय सिंह, नागेंद्र सिंह, विनोद गुप्ता, हिमांशु यादव, वीर प्रताप सिंह, संतोष सिंह आदि मौजूद रहे।