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एसटीपी के अभाव में हर रोज मैली हो रही है गंगा

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पीडीडीयू नगर के रौना स्थित गंगा में गिरता नाबदान का पानी। - फोटो : CHANDAULI
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नगर व रेलवे कालोनी से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा नदी में गिरने से रोकने के लिए 276 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए जमीन का अधिग्रहण अब तक नहीं हो पाया है। जबकि लगभग दो वर्ष पूर्व रौना गांव में जमीन का चिन्ह्निकरण राजस्व विभाग की ओर से कर लिया गया था। राजस्व विभाग की ओर से बरती जा रही लापरवाही का यह हाल तब है कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें गंगा प्रदूषण को लेकर संजीदा है। लाखों लीटर सीवेज गिरने से गंगा हर रोज मैली होती जा रही है।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर व रेलवे कालोनियों से हर रोज तीस एलएलडी (एक एमएलडी में दस लाख लीटर होता है) यानी तीन करोड़ लीटर सीवेज युुुुक्त पानी सीधे गंगा नदी में गिर रहा है। सीवेज को गंगा नदी में गिरने से बचाने के लिए शहर में 276 करोड़ रुपये की लागत से 37 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई। इसके लिए गंगा किनारे रौना गांव में जमीन भी चिन्ह्ति भी कर ली गई। एसटीपी के लिए जमीन देने के लिए रौना के कई किसानों सहमति भी जता दी लेकिन राजस्व विभाग की कमियों के चलते अब तक जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। जबकि एसटीपी के लिए किसानों और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच दो बार अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है। दरअसल रौना ग्रामसभा की खतौनी ऑनलाइन नहीं होने के कारण कई किसानों का वरासतन नाम नहीं चढ़ पाया है। वहीं कुछ लोगों के अंश निर्धारण को लेकर भी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाई है। इन तमाम दुश्वारियों को लेकर पेंच फंसा है। सूत्रों के अनुसार पूरा पेंच शासन स्तर से फंसा है। वहीं तहसील स्तर के अधिकारियों की सुस्ती भी इस प्रक्रिया पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में हर रोज गंगा मैली होती चली जा रही है।
एसटीपी के लिए रौना गांव में हर जमीन चिन्ह्ति कर ली गई है। राजस्व स्तर पर किसी तकनीकी गड़बड़ी के चलते भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। - कृष्ण चंद्र, ईओ, नगर पालिका पीडीडीयू नगर
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