यह पीठ रहस्यों से परिपूर्व और अध्यात्म की अमानत है। यहां से जो एक ऊर्जा निकलती निकलती है, उसे पूरे भारत भूमि पर बिखेरने का एक प्रयास है। बताया कि गुजरात के गिरनार आश्रम में भगवान दत्ताद्रेय और गुरु गोरखनाथ दोनों लोग अध्यात्म का आदान प्रदान कर रहे थे। उस वक्त बाबा कीनाराम चिरकालिक रूप में वहां मौजूद थे।
बताया कि बाबा कीनाराम ने कहा था कि जब मैं काशी में पुन: आऊंगा तो 11वीं गद्दी का पीठाधीश्वर के रूप में आऊंगा। मेरा खप्पर जयपुर के राजघराने और कुबड़ी सकलडीहा के ताजपुर में एक क्षत्रिय परिवार में रखा हुआ है। जो यह लेकर आएगा, यह समझ लेना वह स्वयं बाबा कीनाराम होगा और ऐसा ही हुआ।
पढ़ेंः सीएम योगी के दौरे से पहले सपाइयों और पुलिस के बीच झड़प, लाठीचार्ज, सीओ और विधायक के बीच धक्का-मुक्की
बाबा अघोरेश्वर भगवान अवधूत राम जी के रूप में पुन: रूप वे आए। उन्होंने अपनी ऊर्जा और शक्ति से जिस बालक को जन्म दिया। उसी बालक को आठ साल की अवस्था में 1978 में क्रीं कुंड का पीठाधीश्वर बनाया गया। जो आज बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के नाम से जाने जाते हैं।
वहीं दूसरी तरफ गोरक्ष पीठ में महंत अवैधनाथ जी ने जिस अजय बिष्ट यानी योगी आदित्यनाथ को वहां का पीठाधीश्वर बनाया। जिस प्रकार पुरातन काल में दत्तात्रेय, गुरु गोरखनाथ, बाबा कीनाराम जी एक साथ थे। उसी प्रकार वर्तमान में सिद्धार्थ गौतम राम और योगी आदित्यनाथ हैं।