पीडीडीयू नगर। प्रदेश के अतिपिछड़े जिले में शुमार चंदौली में गरीबी की स्थिति काफी सुधरी है। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के सबसे गरीब जिलों में चंदौली को 35वां स्थान मिला है। जिले में 37.91 फीसद गरीबी है। वाराणसी मंडल के चार जिलों में गाजीपुर और जौनपुर को 25 वां और 27 वां स्थान मिला है। यानि इन जिलों से चंदौली में गरीबी कम है। वहीं कम गरीबी में सबसे नीचे वाराणसी है जिसको 64 वां स्थान मिला है। इन आंकड़ों पर विचार करें तो मंडल में वाराणसी के बाद दूसरा अमीर जिला चंदौली है।
राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक की रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें उत्तर प्रदेश के गरीब जिलों में पहले स्थान पर श्रावस्ती है। जहां 74.38 फीसद गरीबी है। दूसरे पर बहराइच और बलरामपुर हैं। वहीं इस सूची में चंदौली को 35 वां स्थान मिला है। यहां गरीबी का प्रतिशत 37.91 फीसद है। वाराणसी मंडल में गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली और वाराणसी चार जिले आते हैं। गरीबी सूचकांक की रिपोर्ट के अनुसार मंडल में सबसे गरीब जिला गाजीपुर है, जिसे 25 वां स्थान मिला है। यहां गरीबी 41.04 फीसद है। उसके बाद जौनपुर को 27वां स्थान मिला है। जहां गरीबी 40.78 फीसद है। वहीं चंदौली गरीबी में तीसरे स्थान पर है। चौथे स्थान पर वाराणसी है जिसे 64 वां स्थान मिला है। यहां गरीबी केवल 26.03 फीसद है। आंकड़ों का आकलन किया जाए तो मंडल में वाराणसी के बाद सबसे अमीर जिला चंदौली है। चंदौली ने गाजीपुर और जौनपुर को पीछे छोड़ दिया है। जिले में सबसे ज्यादा 42.03 फीसद गरीबी ग्रामीण क्षेत्रों में है। वहीं शहरी क्षेत्र में मात्र 16.60 फीसद ही गरीबी है। वहीं जिले में गरीबी की तीव्रता 44.46 फीसद है।
चंदौली धान का कटोरा है। यहां काला चावल के रूप में नवीन प्रयोग हुआ है जिससे किसानो के आय में वृद्धि हुई है। वहीं जिले के विकास में इंडस्ट्रीयल एरिया का विशेष योगदान रहा है। कोरोना के संकट काल में इडस्ट्री का अहम योगदान रहा। वहीं जिले में सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई है। -संजीव सिंह, जिलाधिकारी, चंदौली