चकिया। चकिया सुरक्षित विधानसभा सीट का गठन तीसरे विधानसभा चुनाव के दौरान 1962 में हुआ था। इसके पूर्व हुए दो विधानसभा चुनाव 1952 तथा 1957 में चकिया तहसील चंदौली विधानसभा सीट से जुड़ी थी। 1962 से लेकर आज तक चकिया विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का आगाज 1952 से हुआ था। 1952 में चकिया विधानसभा सीट का अस्तित्व नहीं था बल्कि चकिया तहसील के मतदाता चंदौली विधानसभा सीट से जोड़े गए थे। यह दौर 1957 के चुनाव में भी जारी रहा। 1962 में हुए तीसरे आम चुनाव के पूर्व विधानसभा सीटों का परिसीमन हुआ। इसके बाद से चकिया विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। इस सीट को 1962 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। चकिया विधानसभा सीट के गठन के दौरान चकिया तहसील के चकिया नौगढ़ तथा शहाबगंज विकास खंड के मतदाताओं के साथ चंदौली विकास खंड के आंशिक क्षेत्र को जोड़ा गया था। वर्ष 2008 में हुऐ परिसीमन में चकिया विधानसभा सीट को पूरा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया। इसमें चंदौली तहसील के कुछ और क्षेत्रों को जोड़ दिया गया। 1952 तथा 1957 में हुए विधानसभा चुनाव में चंदौली विधानसभा में दो सीटें थी। एक सीट सामान्य वर्ग के लिए तो दूसरी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। दोनों चुनाव में चंदौली विधानसभा सीट पर सामान्य सीट पर पंडित कमलापति त्रिपाठी तथा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर राम लखन जीते थे। 1962 में चकिया सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र का गठन होने के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर राम लखन पहले विधायक निर्वाचित हुए उस दौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस स्वतंत्र पार्टी प्रजासोशलिस्ट पार्टी सोशलिस्ट पार्टी और जनसंघ जैसी पार्टियां चुनाव मैदान में उतरी थी।