पीडीडीयू नगर। संस्कार भारती नगर इकाई की ओर से गुरुपूर्णिमा के अवसर पर नगर के कलाकारों को सम्मानित किया गया। गायन, वादन, चित्रकारी सहित अन्य क्षेत्रों में अच्छे कार्य करने वाले सात कलाकारों को अंगवस्त्रम, मान पत्र और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि समाजसेवी आत्माराम तुलस्यान ने कहा कि कलाकार ही संस्कृति के सच्चे संवाहक होते हैं। कला में देश के संस्कृति की झलक मिलती है। इसके साथ ही समाज में सामाजिक मूल्यों की स्थापना होती है। कहा कि जिस समाज या संस्कृति में कलाकारों का सम्मान नहीं होता। उस समाज प्रगतिशील समाज नहीं कहा जा सकता। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनील कुशवाहा ने बताया कि संस्कार भारती की स्थापना देश की संस्कृति एवं सभ्यता की अक्षुण्य बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। इसके पूर्व भानू शंकर चौबे, मारुती नंदन, रवि प्रसाद, राजेश्वर प्रसाद, बैद्यनाथ चक्रवर्ती, राजेश सिंह यादव, सुधीर कुमार पांडेय सहित सात कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर संजय राय, डॉ. ओपी सिंह, आशाराम, अरुण आर्य, दिलीप मौर्या, आरपीएफ की एसआई अर्चना मीणा, डॉ. मनोज सिंह, अनिता कुशवाहा रहे। कार्यक्रम का संचालन सुरेश अकेला ने और धन्यवाद ज्ञापन इकाई के अध्यक्ष सतीश जिंदल ने किया।
पड़ाव। अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सायं कालीन पारिवारिक विचार गोष्ठी में सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद गुरुपदसंभव राम ने कहा कि आज का मानव धन के पीछे भाग रहा है। यह धन माया है। जीवन में मानवता, प्रेम, श्रद्धा और इमानदारी ही सच्चा धन है। कोरोना महामारी ने भी हमें यह सीखा दिया है। महाराज ने कहा कि हम सभी को महामारी से डरना नहीं है, बल्कि सावधान रहता है।
गोष्ठी में महाराज ने कहा कि कोरोना महामारी से भयभीत होने की जरूरत हैं, भय से भी हमारी प्रतिरोधक क्षमता का ह्रास होता है। इसके लिए हमें सतर्क रहना है। यह मानव कृत रोग है। वैसे ही अनेक कुकृत्य समाज में मानवकृत हो रहे हैं। खाद्यान्नों में मिलावट, मार-काट, भ्रष्टाचार के माध्यम से धन एकत्र करना आदि महत्वपूर्ण है। कुकृत्यों से धन तो आ जाता है लेकिन यह फलता नहीं है। मानवता जिसमें ईमानदारी, प्रेम, श्रद्धा, करुणा, मैत्री, दया, सदाचरण हो, यही सच्ची संपत्ति है। यह जीवन भी क्षणभंगुर ही है। कब किसका जीवन समाप्त हो जाय, कहा नहीं जा सकता। अच्छे कर्मों और संत- महापुरुषों की वाणियों पर चलने वालों का समय कैसे बीत जाता है, पता नहीं लगता। लेकिन कुकृत्य करने वाले मनुष्यों का समय कटता नहीं, उनका एक-एक क्षण एक-एक महीना या साल के बराबर होता है। गोष्ठी में डॉ. वीपी सिंह, डॉ. आरके सिंह, भोलांनाथ त्रिपाठी, श्याम सिंह देव, अशोक पांडेय, दामोदरनाथ शाहदेव, हरेन्द्र मिश्र रहे। गोष्ठी की शुरूआत ओमप्रकाश तिवारी के मंगलाचरण से हुआ। संचालन डॉ. अमरज्योति ने और धन्यवाद ज्ञापन हरिहर यादव ने किया।
03. ध्वजा पूजन कर किया गुप्तदान
पीडीडीयू नगर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से नगर के सेंट्रल कॉलोनी में गुरुपूर्णिमा के दूसरे दिन जितेन्द्र सिंह के आवास पर ध्वज पूजन का आयोजन किया गया। इसमें स्वयं सेवकों ने ध्वज को गुरू मानकर पूजा अर्चना की और गुप्तदान किया। इस मौके पर संघ के बौद्धिक प्रमुख ज्योति प्रकाश ने ध्वज प्रार्थना की। इसके बाद हुई गोष्ठी में गुरु की महत्ता का बखान किया। इस अवसर पर हरेन्द्र सिंह, पियुष जासवाल, राकेश तिवारी, बलवंत, बाबला मुखर्जी, गुड्डू सिंह, मारूतिनंदन, अर्जुन तिवारी रहे। संवाद
रिपजोर्ट और संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
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