चार दिन बेसमेंट में गुजारी रात, वापस आने को 70 किलोमीटर चले पैदल
बुलंदशहर/खुर्जा/स्याना/अहार। यूक्रेन में फंसे जिले के तीन और छात्र वापस आ गए। इनके घर पहुंचते ही परिवार में खुशी का माहौल हो गया। घर लौटे छात्रों ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया तो स्वदेश लौटने तक झेली परेशानी से अवगत करवाया। किसी ने चार दिन बेसमेंट में रात गुजारी तो कोई वापस आने के लिए 70 किलोमीटर तक पैदल चला।
खुर्जा की न्यू शिवपुरी कॉलोनी निवासी मधुर सैनी रविवार रात को अपने घर लौटकर आ गए हैं। मधुर युक्रेन में स्थित कीव यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि 24 फरवरी को यूनिवर्सिटी के पास में बम धमाका हुआ। इसके बाद यूनिवर्सिटी में स्थित बेसमेंट में उन्होंने चार दिन गुजारे। परिवार से निरंतर संपर्क बनाया हुआ था। उनके साथ भारत समेत अन्य देशों के छात्र भी बेसमेंट में रह रहे थे। चार दिनों तक बेसमेंट में रहने के बाद उन्होंने 28 फरवरी को कीव छोड़ने की तैयारियां शुरू कर दी। भारतीय एम्बेसी लगातार संपर्क कर रही थी। कीव से उन्होंने लवीब के लिए सुबह आठ बजे ट्रेन ली। करीब दस घंटे का सफर तय करने के बाद वह शाम छह बजे लवीब स्टेशन पर पहुंचे। वहां से उनको हंगरी जाना था, लेकिन लवीब पहुंचने पर जानकारी मिली कि हंगरी बॉर्डर के लिए जाने वाली ट्रेन रद्द है। वहां से बस के माध्यम से छह घंटे का सफर करने के बाद वह चोप स्टेशन पहुंचे। स्टेशन पर ही उन्होंने हंगरी जाने वाली ट्रेन का सात घंटे इंतजार किया। यूक्रेन के समय के अनुसार एक मार्च की रात 11 बजे उन्हें हंगरी जाने के लिए ट्रेन मिली। पांच घंटे 40 मिनट का ट्रेन का सफर तय कर दो मार्च की सुबह सात बजे वह बॉर्डर पार करते हुए हंगरी पहुंच गए। जहां पर उन्होंने चार दिन शेल्टर में गुजारे। पांच मार्च की रात 10 बजे भारत के लिए फ्लाइट मिली। रविवार की दोपहर 12 बजे वह भारत पहुंचे। रात को खुर्जा पहुंचने पर मधुर के परिवार में खुशी है।
मधुर ने बताया कि युद्ध के बाद से रोजाना डर लगा रहता था। कोई भी जगह सुरक्षित नहीं दिख रही थी। युक्रेन में किसी स्थान पर तो बिल्कुल सन्नाटा है तो कुछ स्थान पर लोग अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। ऐसे में रातों रात नींद नहीं आती थी। सभी लोग अपने वतन वापस जाने के लिए बातें करते थे। चार दिन तक कीव में रहने के बाद उनके पास के सभी रुपये खत्म हो गए थे। जब लवीब से हंगरी के लिए बस लेनी थी तो उन्होंने अपने दोस्त गौरव शास्त्री से चार हजार रुपये उधार लिए। वहीं, दूसरी ओर अहार निवासी आतिफ अली ने घर लौटकर प्रधानमंत्री का आभार जताया। उसने बताया कि वहां का माहौल देखने लायक नहीं है। हर तरफ धमाकों की आवाज डरा रही थी। वहां अब कोई नहीं रहना चाहता है। वहां भारत समेत अन्य देश के रहने वाले लगातार परेशानी झेलकर लौट रहे हैं। जिला पंचायत कार्यालय में इंस्पेक्टर राजकुमार ने बताया कि मेरी बेटी इशिता कठेरिया यूक्रेन से निकलकर पोलैंड पहुंची और वहां से देश के लिए उड़ान भर चुकी है। देर रात तक दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच जाएगी।
35 किलोमीटर का था जाम
स्याना। बुगरासी रोड स्थित यश चौधरी के यूक्रेन से अपने घर आते ही परिजनों के चेहरे खिल उठे। यश चौधरी को मिठाई खिला परिवार ने यश का स्वागत किया। यूक्रेन से अपने वतन आने के लिए यश ने 70 किलोमीटर पैदल यात्रा की है। नगर निवासी बिट्टू चौधरी का बड़ा बेटा यश चौधरी डॉक्टर बनने का सपना लेकर 10 नवंबर 2021 को यूक्रेन गया था। लवीद शहर की लवीद इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से यश चौधरी एमबीबीएस कर रहा था। अभी प्रथम वर्ष की पढ़ाई चल ही रही थी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध हो गया। यश चौधरी ने बताया कि यूक्रेन से आने वतन वापस आने के लिए पोलैंड बॉर्डर पर गए थे। लवीद से पोलैंड बॉर्डर 70 किलोमीटर है। कैब किराए पर ली गई, लेकिन बोर्डर से 35 किलोमीटर पहले तक गाड़ियों का लंबा जाम था। कैब ने जाम से पहले ही छोड़ दिया। आगे का 35 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ा। रात को बॉर्डर पहुंचे। रात भर जैसे-तैसे समय काटने के बाद बताया कि बुडापेस्ट जाना है। अगले दिन 35 किलोमीटर जाम का पार करने के लिए फिर पैदल यात्रा की और वापस कैब कर लवीद आ गए। दो दिन बाद वहां से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचे। बुडापेस्ट में पहुंचने पर रुकने से लेकर खाने-पीने की बेहतर सुविधा था। पूर्व का सारा तनाव दूर हो गया और घर जाने का रास्ता साफ नजर आने लगा। यश चौधरी ने बताया कि अब अपने वतन, आने घर आकर खुशी हो रही है। अपने नागरिकों की सकुशल वापसी में भारत सरकार का संपूर्ण योगदान सराहनीय है। संवाद