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दोषी पुलिसकर्मियों को बचाता रहा विभाग : यशपाल सिंह

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दोषी पुलिसकर्मियों को बचाता रहा विभाग : यशपाल सिंह
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बुलंदशहर/सिकंदराबाद। 19 वर्ष पूर्व हाईवे-91 पर ग्राम बिलसूरी के पास कोतवाली क्षेत्र के गांव सहपानी निवासी छात्र प्रदीप कुमार की मुठभेड़ में मौत के मामले में यूपी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट से परिजन संतुष्ट नहीं हैं। छात्र के पिता यशपाल सिंह ने विभाग पर दोषी अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है।
28 अक्तूबर को यूपी सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट में कोतवाली सिकंदराबाद में तैनात रहे चार इंस्पेक्टर, वर्तमान इंस्पेक्टर, चार पुलिसकर्मियों को कोर्ट के आदेशों का अनुपालन कराने में देरी करने का दोषी मानते हुए विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। मृतक छात्र प्रदीप के पिता यशपाल सिंह ने बताया कि यूपी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा की गई स्टेटस रिपोर्ट में आरोपियों को बचाने वाले अधिकारियों के नाम गायब हैं। मामले में सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट बुलंदशहर ने दोषी पुलिसकर्मियों का वेतन रोकने और उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश पर एसएसपी मुरादाबाद, ट्रेजरी ऑफिस ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए बताया था कि मुरादाबाद में तैनात रहे सीओ रणधीर सिंह का वेतन रोक दिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। हलफनामा दायर करने के बाद भी न तो आरोपी रणधीर सिंह को गिरफ्तार किया गया और न ही वेतन रोका गया। 2020 में उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी गई। मथुरा में तैनाती के दौरान आरोपी सिपाही मनोज कुमार का भी वेतन नहीं रोका गया और न ही गिरफ्तार किया गया। बल्कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं करने वाले दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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इन पुलिस कर्मियों को माना गया दोषी
यूपी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि एसएसपी बुलंदशहर द्वारा कराई जांच में प्रथम दृष्टया वर्तमान कोतवाली प्रभारी जयकरन सिंह, तत्कालीन इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर संजय कुमार पांचाल, इंस्पेक्टर सुधीर कुमार, इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार बालियान, हेड कांस्टेबल विनोद कुमार, धर्मवीर सिंह, मनवीर सिंह, कांस्टेबल गुलशन कुमार ने कोट के आदेशों का अनुपालन कराने में देरी की है। इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सभी लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
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यह था मामला
तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद कोतवाली में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रणधीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि वह बुलंदशहर कोतवाली देहात सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए सिकंदराबाद की तरफ लौट रहे थे। गांव आढ़ा मोड़ के निकट बिलसूरी की तरफ से फायरिंग की आवाज सुनाई दी। जिस पर वह हमराह पुलिसकर्मी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, जीप चालक श्रीपाल, संजीव कुमार, सतेंद्र, तोताराम एवं रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे। वहां पर एक रोडवेज बस से उतरकर तीन बदमाश भागते दिखाई दिए। पुलिस टीम के रोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई। सिकंदराबाद पुलिस ने जिस युवक को लुटेरा बताया था, वह युवक बीटेक का छात्र था।
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