अब गाजियाबाद-हापुड़ और गौतमबुद्धनगर जाने वाले लोगों की राह सुगम होने वाली है। सिंचाई विभाग ने दोनों नहर के बीच की पटरी पर सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। करीब 40.9 किमी लंबी सड़क के निर्माण पर आठ करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की जाएगी। हालांकि सड़क केवल तीन मीटर चौड़ी होगी, लेकिन एंबुलेंस व अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए यह काफी होगा।
पुरानी नहर के बीच की पटरी पर सड़क बनाए जाने का प्रस्ताव
जिले के लोगों को हापुड़-गौतमबुद्धनगर-गाजियाबाद पहुंचने के लिए यूं तो नेशनल हाईवे की सौगात पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब सिंचाई विभाग ने एक और सड़क बनाने के लिए कदम बढ़ाया है। योजना के तहत अपर गंग नहर और पुरानी नहर के बीच की पटरी पर सड़क बनाए जाने का प्रस्ताव है। सड़क बनने के बाद पड़ोसी जिले को जाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग भी मिल सकेगा। जिले के मुंडाखेड़ा से शुरू होने वाली यह सड़क गौतमबुद्धनगर के देहरा तक पहुंचेगी। जिले में नहर के बीच बनाई जाने वाली सड़क की कुल लंबाई 28 किमी और शेष 12 किमी हापुड़ व गौतमबुद्धनगर में पड़ेगी। प्रस्तावित मार्ग के बनने के बाद हापुड़ की दूरी 12 और गौतमबुद्धनगर की दूरी 16 किमी कम हो जाएगी। निर्माण के लिए अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। अब शासन से अनुमति और फंड मिलने के बाद ही आगे का कार्य शुरू हो सकेगा।
गौतमबुद्धनगर, हापुड़ व बुलंदशहर को होगा फायदा
गौतमबुद्धनगर के देहरा से बुलंदशहर के मुड़ाखेड़ा तक सड़क का निर्माण होगा। देहरा जारचा, पारपा, मोहम्मदपुर, फकाना, सहपानी,नगला काला, बेनीपुर, सनौटा, देहरा पार्का, सनौटा, दूदूपुर, अच्छेजा, चीती, गेसुपुर समेत सैकड़ों गांवों को फायदा होगा।
सिल्ट सफाई की खानापूर्ति की समस्या होगी दूर
नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। अभी तक दोनों नहरों के बीच का रास्त झाड़ियों से अटा और ऊबड़ खाबड़ होने के कारण वहां पर मॉनीटरिंग के नाम पर अधिकारी खानापूर्ति करते हैं, लेकिन यदि यहां पर सड़क का निर्माण हो जाएगा तो सिल्ट सफाई की मॉनीटरिंग करना भी आसान होगा। पिछले माह में ही नहर की कुल 298 किमी सफाई के लिए 3.93 करोड़ रुपये का खर्च किया गया था।
शासन से अनुमति के बाद शुरू होगा काम
मुंडाखेड़ा से गौतमबुद्धनगर के देहरा तक करीब 40 किमी सड़क बनाने की योजना बनाई गई है। योजना के बाद में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड व अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता सुगम होगा और कम समय में अन्य जनपदों में पहुंचा जा सकेगा। करीब आठ करोड़ का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- संजय सिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग