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अमर उजाला शिक्षा अभियान: बंद हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, स्कूल खुलने से छात्र उत्साहित, 90 फीसदी पहुंची हाजिरी

Thu, 24 Mar 2022 05:24 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर

सार

कोरोना काल में माता-पिता की मौत के बाद बेसहारा हुए बच्चों को स्कूल निशुल्क पढ़ा रहे हैं। वहीं स्कूल खुलने से छात्र-छात्राएं उत्साहित हैं। छात्र व अभिभावक दोनों ऑनलाइन पढ़ाई के जगह ऑफलाइन पढ़ाई कराना पसंद कर रहे हैं। इससे निजी विद्यालयों में छात्र उपस्थिति भी बढ़ी है। 
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अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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स्कूल खुलने से छात्र-छात्राएं काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। निजी विद्यालयों में 40 फीसदी से बढ़कर उपस्थिति 85 से 90 फीसदी पहुंच गई है। सेंट आरजे और सेंट मोमिना स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि पिछले एक महीने में उपस्थिति 50 फीसदी तक बढ़ गई है। अधिकतर स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं को बंद कर दिया है। यह भी उपस्थिति बढ़ने का बड़ा कारण है। साथ ही छात्र और उनके अभिभावक भी ऑनलाइन पढ़ाई के स्थान पर ऑफलाइन पढ़ाई कराना पसंद कर रहे हैं। छात्र छात्र श्रेयांश का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कई तथ्य समझ में नहीं आ रहे थे। कई बार ऐसा लगता था जैसे यू-ट्यूब से पढ़ाई कर रहे हैं।

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कोरोना की पहली लहर में सभी स्कूल कालेज पूरी तरह से बंद हो गए थे। इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प निकाला गया। सभी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कराईं। अधिकतर अभिभावकों ने दूसरी लहर समाप्त होने तक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। खासकर छोटी कक्षाओं के बच्चे करीब डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय तक स्कूल ही नहीं गए। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई कराना सही समझ रहे थे। सरकार ने कोरोना की तीसरी लहर के बाद सात फरवरी से कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों को खोल दिया गया था। जबकि 14 फरवरी से नर्सरी से ऊपर तक के स्कूल खोल दिए। स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था कराई है।
 

फीस जमा न कर पाने के चलते 10 फीसदी बच्चे हुए ड्रापआउट


सीबीएसई के नोडल एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य डा. एचएस वशिष्ट ने बताया कि जिले में सीबीएसई के 114 स्कूल हैं। इनमें करीब 2.50 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनमें से 10 फीसदी बच्चे कोरोना में फीस जमा न करने व अन्य कारणों से ड्रापआउट हो गए हैं। उन बच्चों को दोबार स्कूल में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बोर्ड ने ऐसे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर कुछ राहत देकर स्कूल में लाने के लिए निर्देश दिए हैं। छात्र और छात्राओं की उपस्थिति लगभग एक जैसी है। ये बच्चे कोरोना काल में अभिभावकों के व्यापार चौपट होने और नौकरी छूटने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। बच्चों की फीस जमा न कर पाने के कारण मजबूरी में उन्हें ड्रापआउट किया है।

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कोरोना काल में बेसहारा हुए 104 बच्चों को मिल रही निशुल्क शिक्षा
कोरोना की पहली, दूसरी लहर के दौरान विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में से किसी के पिता या किसी की माता की मृत्यु हो गई थी। ऐसे 104 छात्र-छात्राओं को निजी स्कूलों ने निशुल्क शिक्षा देना शुरू कर दिया है। इन छात्र-छात्राओं पर बकाया पुरानी फीस को भी माफ कर दिया गया है। डीपीएस के उप प्रधानाचार्य सावन खन्ना ने बताया कि विद्यालय में 21 बच्चों निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। इनकी फीस डीपीएस सोसायटी दे रही है।
 

प्रधानाचार्य बोलीं- कहानी कविताओं के माध्यम से बढ़ाई जा रही उपस्थितिसेंट आरजे स्कूल सिटी ब्रांच की प्रधानाचार्य रेनू सिंह ने बताया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई की आदत पड़ गई है। वह घर पर रहकर ही पढ़ाई करना पसंद कर रहे हैं। ऐसे बच्चों को स्कूल बुलाने और उपस्थिति बढ़ाने के स्कूलों ने नये तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। उन्हें विभिन्न कहानियां, कविताओं और तरह-तरह के खेलों के माध्यम उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
 

डेढ़ महीने में 50 फीसदी बढ़ गई छात्रों की संख्याजिले के संतोष इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य के भूपेंद्र कुमार ने बताया कि सात फरवरी को जब स्कूल खुले तो छात्रों की संख्या बहुत कम थी। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई। डेढ़ महीने में 50 फीसदी से अधिक छात्रों की संख्या बढ़ी है। 
 

अभिभावक भी चाहते हैं स्कूल जाएं बच्चे
 आजाद पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य नितेश कुमार सिंह का कहना है कि कोरोना काल के दौरान कुछ छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई की आदत पड़ गई थी। वह नहीं चाहते थे कि स्कूल आना पड़े। कुछ छात्र ऑफलाइन कक्षाओं से पढ़ना पसंद कर रहे थे। अभिभावकों की रूचि के बाद स्कूल में शतप्रतिशत उपस्थिति हो गई है। एक महीने में सभी बच्चों ने स्कूल आना शुरू कर दिया है। 
 

यह बोले अभिभावक-

कोरोना काल में आर्थिक संकट झेला, बच्चों की फीस तक जाम नहीं कर सके। व्यवस्था कर उनकी फीस जाम की तो आज उसकी रिजल्ट भी मिल रहा है। स्कूल खुलने के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। -मोहम्मद कासिम।


स्कूल खुलने के बाद कुछ हद तक कई चिंता भी दूर हो गई। बच्चों में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान बच्चे चिड़चिड़े दिखाई दे रहे थे। अब ऐसा नहीं है। -आजाद चौधरी।
 

छात्रों का है यह कहना-

स्कूल पहुंचे तो वहां पहले से बेहतर सुविधाएं मिली। शिक्षक जहां पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं तो हमारे स्वास्थ्य और अन्य गविधियों से अभिभावकों को भी अवगत करवा रहे हैं। - इशान, आठवीं कक्षा


ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी लिखने और पढ़ने का पूरा होमवर्क दिया जाता था। अब स्कूल से भी होमवर्क मिल रहा है, जिससे कम हुई लिखावट फिर से पटरी पर लौटने लगी है। - अभिनव जादौन, आठवीं कक्षा 

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