स्कूल खुलने से छात्र-छात्राएं काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। निजी विद्यालयों में 40 फीसदी से बढ़कर उपस्थिति 85 से 90 फीसदी पहुंच गई है। सेंट आरजे और सेंट मोमिना स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि पिछले एक महीने में उपस्थिति 50 फीसदी तक बढ़ गई है। अधिकतर स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं को बंद कर दिया है। यह भी उपस्थिति बढ़ने का बड़ा कारण है। साथ ही छात्र और उनके अभिभावक भी ऑनलाइन पढ़ाई के स्थान पर ऑफलाइन पढ़ाई कराना पसंद कर रहे हैं। छात्र छात्र श्रेयांश का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कई तथ्य समझ में नहीं आ रहे थे। कई बार ऐसा लगता था जैसे यू-ट्यूब से पढ़ाई कर रहे हैं।
सीबीएसई के नोडल एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य डा. एचएस वशिष्ट ने बताया कि जिले में सीबीएसई के 114 स्कूल हैं। इनमें करीब 2.50 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनमें से 10 फीसदी बच्चे कोरोना में फीस जमा न करने व अन्य कारणों से ड्रापआउट हो गए हैं। उन बच्चों को दोबार स्कूल में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बोर्ड ने ऐसे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर कुछ राहत देकर स्कूल में लाने के लिए निर्देश दिए हैं। छात्र और छात्राओं की उपस्थिति लगभग एक जैसी है। ये बच्चे कोरोना काल में अभिभावकों के व्यापार चौपट होने और नौकरी छूटने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। बच्चों की फीस जमा न कर पाने के कारण मजबूरी में उन्हें ड्रापआउट किया है।
कोरोना काल में आर्थिक संकट झेला, बच्चों की फीस तक जाम नहीं कर सके। व्यवस्था कर उनकी फीस जाम की तो आज उसकी रिजल्ट भी मिल रहा है। स्कूल खुलने के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। -मोहम्मद कासिम।
स्कूल खुलने के बाद कुछ हद तक कई चिंता भी दूर हो गई। बच्चों में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान बच्चे चिड़चिड़े दिखाई दे रहे थे। अब ऐसा नहीं है। -आजाद चौधरी।
स्कूल पहुंचे तो वहां पहले से बेहतर सुविधाएं मिली। शिक्षक जहां पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं तो हमारे स्वास्थ्य और अन्य गविधियों से अभिभावकों को भी अवगत करवा रहे हैं। - इशान, आठवीं कक्षा
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी लिखने और पढ़ने का पूरा होमवर्क दिया जाता था। अब स्कूल से भी होमवर्क मिल रहा है, जिससे कम हुई लिखावट फिर से पटरी पर लौटने लगी है। - अभिनव जादौन, आठवीं कक्षा