फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक जिला एक उत्पाद से जिले के आम को खास बनाने की तैयारी

विज्ञापन
आम - फोटो : BULANDSHAHR
विज्ञापन
एक जिला एक उत्पाद से जिले के आम को खास बनाने की तैयारी
विज्ञापन

बुलंदशहर। सबकुछ ठीक रहा तो जिले का आम एक ब्रांड के रूप में देश-विदेश में पहचाना जाएगा। इसके लिए विभाग आम को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है। अफसरों का कहना है कि विभाग के प्रयास पर यदि शासन ने अनुमति दे दी तो बागान किसानों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी।
जिले का आम प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान आदि राज्यों में भी सप्लाई किया जाता है। वहीं, अभी तक आम को विदेश में भी भेजा जाता है, लेकिन यह आम वहीं लोग विदेश भेजते हैं, जिनके रिश्तेदार या परिचित वहां रहते हैं। बावजूद इसके अभी तक बाहरी प्रदेशों और विदेश में जाने के बाद भी आम का कोई ब्रांड नहीं बन पाया है। जबकि जो बाहरी व्यापारी यहां से आम खरीदकर ले जाते हैं वह अपने ब्रांड के नाम से उसकी सप्लाई करते हैं। इससे फलों के राजा आम को जो महत्व मिलना चाहिए। वह नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

दी जाएगी ट्रेनिंग
सरकार की ओर से सब्सिडी भी मिलेगी। आम से जुड़े फूड प्रोसेसिंग यूनिट और उत्पाद की मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से जिले में आम के बाग का रकबा, उत्पादन और अन्य जरूरी जानकारी एकत्रित करने की तैयारी कर ली है। अफसरों का दावा है कि जल्द ही फाइल बनाकर शासन को भेजकर जिले के आम को एक जिला एक उत्पाद में शामिल करने की मांग की जाएगी।
स्याना क्षेत्र को कहा जाता है फल पट्टी
जिले के स्याना क्षेत्र को फल पट्टी के नाम से जाना जाता है। यहां पर सबसे अधिक बाग हैं और केसर, दशहरी, लंगड़ा, पुस्ता, रटौल, चौंसा, फजली, मल्लिका, आम्रपाली अनेक वरायटी के आम हैं, जिन्हें काफी पसंद किया जाता है। इस क्षेत्र के बागान किसानों की आम को देश के प्रत्येक कोने और विदेश से पहुंचाने के लिए फ्रूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग हाउस और उत्पाद की मार्केटिंग की मांग भी चली आ रहा है।
गत दो साल से घाटे में चल रहे बागान किसान
गत दो साल से कोरोना काल के चलते जिले के बागान किसान घाटे में चल रहे हैं। गत वर्ष कोरोना कर्फ्यू के कारण आम बाहर सप्लाई नहीं हो सका था। साथ ही आम में रोग आ गया था। इसी तरह इस बार भी अधिकतर आम बाहर सप्लाई नहीं हो सका और रोग भी लग गया। इससे बागान किसानों को करोड़ाें का नुकसान उठाना पड़ा है।
विज्ञापन

जिले में आम का रकबा और उत्पादन
- आम का रकबा : 14 हजार हेक्टेयर
- उत्पादकता : 2.50 लाख मीट्रिक टन
- आम उत्पादक किसानों की संख्या : 1500
- निर्यात होने वाले आम : 1.50 लाख मीट्रिक टन
जिले में बहुतायत में आम का उत्पादन होता है। लेकिन अभी तक जिले के आम को देश-विदेश में ब्रांड के रूप में पहचान नहीं मिल सकी है। संसाधनों के अभाव में बागान किसानाें को घाटा भी उठाना पड़ता है। ऐसे में अब विभाग की ओर से जिले के आम को एक जिला एक उत्पाद शामिल कराने की पहल शुरू की है। यदि शासन ने इस पर मुहर लगा दी तो बागान किसानों को काफी लाभ मिलेगा।
- एनके साहानिया, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें