दो साल में डेढ़ गुना महंगी हो गई खेती, सिंचाई- जुताई पर 50 फीसदी बढ़ा खर्च
बुलंदशहर। किसानों की आमदनी दोगुना करने के प्रयासों को महंगाई ने झटका दे दिया है। दो वर्षों में ही खेती डेढ़ गुना तक महंगी हो गई है। सिंचाई, जुताई और फसल कटाई पर 50 फीसदी तक खर्च बढ़ गया है। स्थिति यह है कि धान और गेहूं की खेती में तो खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। वहीं, किसानों का कहना है कि अब खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
इस समय पेट्रो पदार्थों से लेकर लगभग सभी चीज महंगी हो रही है। इसका असर खेती पर भी पड़ने लगा है। सिर्फ खाद के दाम में कुछ ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन बीज और कीटनाशक दवा आदि पर खर्च काफी बढ़ गया है। डीजल के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी से खेती महंगा सौदा हो गया है।
किसानों का कहना है कि धान और गेहूं की खेती में अब खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। सभी किसान सब्जी और फल की खेती नहीं कर पाते। धान की खेती में प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये खर्च आ रहा है। वहीं, उत्पादन 10 से 12 क्विंटल मिलता है। सरकारी केंद्रों पर खरीद नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में किसानों को दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से भी धान का दाम नहीं मिल पाता है। मजबूरन इससे भी कम रेट पर धान को मंडी में बेचना पड़ता है। इस तरह से लागत भी नहीं निकल पाती है। डीजल का दाम 90 रुपये प्रति लीटर से अधिक है।
3.65 लाख हेक्टेयर में होती है खेती
जनपद में 3.65 लाख हेक्टेयर भूमि में खेती की जाती है।
एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में धान और करीब 70 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की फसल के अलावा शेष भूमि में अन्य फसल की जा रही है।
दो साल में इस तरह हुई है प्रति एकड़ खेती महंगी
लागत अब का खर्च पहले होने वाला खर्च
बीज 1500 1000
जुताई 2000 1200
रोपाई 3000 2000
खाद 2500 2000
दवा 600 400
सिंचाई 3000 2000
निराई-गुड़ाई 1250 1000
कीटनाशक 2500 2000
कटाई 3000 2000
नोट : छोटे-छोटे अन्य खर्च के अलावा किसान की मेहनत इसमें शामिल नहीं है।
महंगाई से खेती करना मुश्किल
एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है। वहीं, दूसरी ओर लगातार सभी चीज महंगी हो रही है। ऐसे में खेती की लागत भी 50 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। इससे खेती करना मुश्किल हो रहा है।
- पवन तेवतिया, प्रदेश अध्यक्ष, भाकियू अंबावता।
खेती के लिए सोचना पड़ रहा
डीजल महंगा, बिजली महंगी और फसल के लिए जरूरी सभी सामान महंगा हो गया। ऐसे में अब खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। ठेके पर जमीन लेकर खेती करना भी सौ बार सोचने पर मजबूर कर रहा है।
- किसान ओमपाल सिंह।
बढ़े फसल का दाम
महंगाई के चलते फसलों की लागत तो बढ़ गई, लेकिन किसान की फसल के दाम नहीं मिले हैं। यदि किसान की आय दोगुनी करनी है तो पहले फसल के दाम बढ़ाकर क्रय केंद्र से लेकर मंडी तक एक समान निर्धारित करें।
- किसान महेंद्र सिंह।
दो साल से लगातार बढ़ रही महंगाई
लगातार बढ़ रही महंगाई में खेती घाटे का सौदा बन रही है। पिछले दो साल से खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। 65 रुपये लीटर वाला डीजल 90 रुपये के पार हो गया। ऐसे में जुताई आदि की लागत भी बढ़ गई है।
- किसान कृष्ण पाल।
बढ़ गई डेढ़ गुना लागत
डीजल के दाम बढ़ने के साथ अन्य चीज महंगी होने के कारण भी खेती महंगी हो गई है। खेती की लागत बढ़ने से किसान की आय भी प्रभावित होने लगी है। गत दो वर्ष में खेती पर करीब डेढ़ गुना लागत बढ़ गई है।
- डॉ. विवेकराज, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।