एजेंसी-टावर के नाम पर आठ से ठगी
बुलंदशहर। इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। लगातार बढ़ रही उपयोगकर्ताओं की संख्या और इंटरनेट सफरिंग का फायदा शातिर साइबर ठग उठा रहे हैं। इंटरनेट पर विभिन्न कंपनियों के नाम से फर्जी वेब पेज नजर आ जाएंगे। जिन पर विश्वास कर लोग बिना किसी जांच पड़ताल के उनके झांसे में आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। जनपदभर में करीब आठ लोग गत पांच माह में इनका शिकार हो चुके हैं।
फर्जी वेब पेज से ऐसे करते हैं ठगी
साइबर एक्सपर्ट की मानें तो वेब पेज बीते काफी समय से शातिर साइबर अपराधियों का ठगी करने का एक प्लेटफार्म है। वर्तमान में खासतौर पर बेरोजगार युवा या फिर अपना नया स्टार्टअप शुरू करने या फिर किसी कंपनी की डीलरशीप और किसी कंपनी का टावर लगवाने के इच्छुक लोग उनका शिकार बनते हैं। शातिर किसी भी कंपनी का फर्जी वेब पेज तैयार करते हैं, जिस पर उनका मोबाइल नंबर व उनसे जुड़ने के विभिन्न तरीके भी उपलब्ध होते हैं। जब, कोई व्यक्ति उनसे डीलरशिप या टावर लगवाने आदि के लिए संपर्क करता है तो ठग उक्त व्यक्ति को प्रलोभन देकर अपने झांसे में ले लेते हैं। जिससे कि लोग बिना कोई पुख्ता इंक्वायरी किए ही उनके झांसे में आकर अपनी रकम उनके खाते में जमा कर देता है। ठगी का उसे बाद में पता चलता है, जब न तो उसे एजेंसी मिलती है और न ही वेबसाइट पर दिए नंबर से संपर्क हो पाता है।
अजीत से शातिरों ने ठगे 4.35 लाख रुपये
नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी अजीत सिंह ने गत आठ अगस्त को साइबर सेल कार्यालय में एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि वह हरियाणा की एक ई-बाइक कंपनी की डीलरशिप बुलंदशहर में लेना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर उक्त कंपनी के नाम से सर्च किया तो एक वेबपेज को ओपन किया। जिसके जरिए उन्होंने एक मोबाइल नंबर वेबपेज से प्राप्त किया और संबंधित नंबर पर कॉल की। जिसके बाद शातिर ने उन्हें एजेंसी देने का झंासा दिया। पीड़ित ने के झांसे में आकर तीन अगस्त 2021 को शातिर के बताए खाते में 1.35 लाख रुपये और फिर 4 अगस्त 2021 को दूसरे खाते में 3 लाख रुपये जमा करा दिए। पीड़ित को चार दिन बाद अपने ठगे जाने की जानकारी हुई।
महाराष्ट्र के निकले दोनों खाताधारक, दर्ज होगी एफआईआर
मामले की जानकारी पीड़ित ने पुलिस को चार दिन बाद दी। साइबर सेल में तैनात उपनिरीक्षक राजीव गौड़ ने बताया कि जब जांच की गई तो सामने आया कि उक्त दोनों खाते महाराष्ट्र के दो विभिन्न बैंकों के हैं। आरोपियों ने तीन और चार अगस्त को ही रकम खाते में आने के बाद एटीएम कार्ड के माध्यम से निकाल ली थी। पीड़ित यदि उसी दौरान मामले की जानकारी पुलिस को देता तो शायद उनकी रकम को आरोपियों के खाते सीज कराकर वापस कराया जा सकता था। वहीं, अब मामले में साइबर टीम की रिपोर्ट के आधार पर नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। जिसके बाद नगर पुलिस आरोपियों के खाते से मिले डाटा के माध्यम से आरोपियों की तस्दीक कर अग्रिम कार्रवाई करेगी।
रहें सावधान
- इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करने के दौरान उसकी विश्वसनीयता को परख लें।
- किसी कंपनी के बारे में जानकारी कर रहे हैं तो पूर्ण रूप से उसकी जानकारी हासिल करें।
- बिना जानकारी के कोई भी रकम उनके खाते में जमा न कराएं।
फिशिंग वेब पेज के जरिए ठगी करना साइबर शातिरों का तरीका है। जिसके जरिए पीड़ित बिना पुख्ता जानकारी हासिल किए आरोपियों के चंगुल में फंस जाता है और अपनी जमा पूंजी उनको सौंप देता है। कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह तुरंत सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 155260 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। - कमलेश बहादुर, एसपी क्राइम