मेरे दिल ने आवाज दी वतन से बड़ी कोई चीज नहीं : संतोष आनंद
बुलंदशहर। जिला प्रदर्शनी के ओपन स्टेज पर बृहस्पतिवार रात्रि कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें देश के प्रसिद्ध गीताकर संतोष आनंद, ओज कवि डॉ. हरिओम पंवार समेत प्रसिद्ध कवियों ने अपनी कविताओं से लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में पधारे प्रसिद्ध गीतकार व ओज कवि ने जब कविता सुनाने की शुरुआत की तो मौके पर मौजूद लोग तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।
जिला प्रदर्शनी के ओपन स्टेज पर आयोजित हुए कवि सम्मेलन का डीएम चंद्रप्रकाश सिंह, सीडीओ अभिषेक पांडेय, एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक मिश्र, एडीएम प्रशासन डॉ. प्रशांत कुमार, एसपी देहात बजरंगबली चौरसिया, नगर मजिस्ट्रेट मीनू राणा, एसडीएम लवी त्रिपाठी, कवि डॉ. हरिओम पंवार और अर्जुन सिसोदिया आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित और माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम में सबसे पहले संयोजक अंजली सिसोदिया ने वंदना हंस वाहिनी की शारदे की स्तुति प्रस्तुत कर शुरुआत की। इसके बाद हास्य कवि विनोद पाल ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। फिर कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने लाल महावर लगे मेरे इन पांव की चिंता मत करना, सीमा पर जागे रहना तुम गांवों की चिंत मत करना, सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद के मंच पर आते ही तालियां से पंडाल गूंज उठा। उन्होंने सुनाया तुम्ही से प्यार करता हूं, तुम्हीं पर जान देने आया हैू आखिरी वक्त है इम्तहान देने आया हूँ। फिर सुनाया नजर से कहने लगे, नयन से बड़ी चीज कोई नहीं, नजारे नजर से कहने लगे, तभी मेरे दिल ने आवाज दी वतन से बड़ी कोई चीज नहीं। फिर एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, जिंदगी कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है गीत प्रस्तुत किया। प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार सहित सभी कवियों ने उनका जमकर साथ दिया। इसके बाद दा कश्मीर फाइल फिल्म के बारे में बताते हुए... है कफन का कपड़ा जेबों में हम मर मिट जाने आए हैं सुनाया। वीर रस के प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार ने पैरों में अंगारे बांधे, सीने में तूफान भरे, आंखों में जो सागर आए, कई हिमालय शीश भरे और हथियारों के बल पर कोई देश लूटते देखा है काव्य पाठ किया। डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने सुनाया, वो देश की चिंता करते थे तुम जेब की चिंता करते हो। तुम लूट खजाना भारत का स्विस के खाते में भरते हो। आईएएस कवि डॉ. अखिलेश मिश्रा ने अब अदालत में खड़ी मूरत रूआंसी हो रही है कविता प्रस्तुत की। प्रसिद्ध गीतकार डॉ. कीर्ति काले ने भाई की भुजाओं के शौर्य पर भरोसा है, सरहदों पे बहनों की राखियां बताती हैं। याद कोई करता है हिचकियां बताती हैं, कौन पास कितना है दूरियां बताती हैं। कोरोना तेरी बहुत हुई मनमानी, पिला दिया छोटे भाई ने बड़ो-बड़ो को पानी सुनाया। कवि पंकज शर्मा ने सुनाया फकीरी जिंदगानी है, फकत इतनी कहानी है। कवि प्रवीण राही ने बात जब भी होती है अपनो की, मां से ज्यादा कोई करीब नहीं, इंसान वो बहुत ही अभागा है, मां की ममता जिसे नसीब नहीं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता गीतकार संतोष आनंद ने संचालन डॉ. अर्जुन सिसोदिया और हेमंत सिंह संयुक्त रूप से किया। इस दौरान कार्यक्रम में आए कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोहने की कोशिश की। इस दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। संतोष आनंद के गीत को सुनकर कवि सम्मेलन में माहौल भावुक और जोश से भर गया। वहीं, कवि सम्मेलन का आयोजन देर रात्रि तक जारी रहा।