आयुष्मान योजना : तीन वर्ष में महज 27 फीसदी के बने कार्ड
बुलंदशहर। गरीबों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन वर्ष पहले शुरू की गई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिले में अफसरों की लापरवाही का शिकार हो रही है। जिले में अब तक पात्र लाभार्थियों में से महज 27 फीसदी के ही गोल्डन कार्ड बन पाए हैं।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान योजना तीन वर्ष पहले 23 सितंबर 2018 को पूरे देश में एक साथ शुरू हुई थी। योजना को बुधवार को तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे। आयुष्मान योजना के तहत जिले में 2,01,662 पात्र परिवार हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार एक परिवार में औसतन पांच सदस्य माने जाते हैं। इस प्रकार जनपद में 10,08,310 लोगों को गोल्डन कार्ड दिए जाने हैं। अब तक जनपद में मात्र 2,70,036 लोगों को ही गोल्डन कार्ड दिए जा सके हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो अब भी 7,38,274 लाभार्थी गोल्डन कार्ड से वंचित हैं।
कुल पात्र - 10,08,310
गोल्डन कार्ड धारक - 2,70,036
वंचित पात्र लाभार्थी - 7,38,274
सरकारी चिकित्सालयों में बनाए जाते हैं कार्ड
आयुष्मान योजना में लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, खुर्जा जटिया चिकित्सालय, खुर्जा महिला अस्पताल और सिकंदराबाद संयुक्त चिकित्सालय समेत अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था है। अधिकांश समय संबंधित स्थानों पर आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए पहुंच रहे लोगों को स्टाफ न मिलने या कोई अन्य कारण होने पर बैरंग लौटना पड़ता है।
20,450 पात्र करवा चुके उपचार
जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लाभार्थी परिवार पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार करवा सकता हैं। जिले में अब तक 20,450 लाभार्थी योजना के तहत अपना उपचार करा चुके हैं। लोगों का कहना है कि जनपद में पात्रों की संख्या के आधार पर इस योजना में शामिल सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ और सुविधाएं नहीं हैं। वहीं, निजी अस्पताल नाकाफी है। अगर योजना में अधिक से अधिक निजी अस्पतालों को जोड़ा जाए तो लाभार्थियों को काफी राहत मिलेगी। स्वास्थ्य अफसरों के अनुसार सरकारी चिकित्सालयों में 221 और निजी अस्पतालों में 20,229 पात्र लाभार्थी उपचार करवा चुके हैं।
जनपद में अब तक 2,70,036 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए 17 सितंबर से पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही पात्र लाभार्थी सरकारी चिकित्सालय में कार्ड बनवा सकते हैं। - डॉ. रोहताश यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी