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कोरोना टीकाकरण : न कोई शंका, न डर, लड़कों से पीछे नहीं रहेंगी लड़कियां

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टीका लगवाती एक छात्रा। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। कोरोना टीकाकरण में लड़कियां भी लड़कों से पीछे नहीं हैं। आमतौर पर टीके आदि से लड़कियों में भय और भ्रांति का माहौल रहता है लेकिन यहां स्थिति अलग है। टीकाकरण के मामले में लड़कियां, लड़कों से आगे तो नहीं निकलीं हैं, लेकिन ज्यादा पीछे भी नहीं हैं। स्कूलों में लगने वाले कैंपों में लड़कों की तरह लड़कियां भी बढ़-चढ़कर टीका लगवा रही हैं।
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जिले में संपूर्ण टीकाकरण की बात करें तो अब तक 2223495 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें 2129378 लोगों ने दूसरा टीका भी लगवा लिया है। 15 से 17 वर्ष के 215226 किशोर-किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें 86083 किशोर-किशोरियों ने दूसरा टीका लगवा लिया है। किशोर-किशोरियों का टीकाकरण तीन जनवरी से शुरू हुआ था। 12 से 14 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण 16 जनवरी से शुरू हुआ है। अब तक 4731 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। 28 दिन बाद दूसरा टीका लगाया जाएगा। जिले में कुल 2.19 लाख किशोर-किशोरियों और 1.32 लाख बच्चों को टीका लगाया जाना है। 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार सोमवार से बढ़ेगी।
किशोर और किशोरियों के कुल टीकाकरण अनुपात की बात करें तो यह करीब 60 और 40 प्रतिशत का है। मतलब टीका लगवाने वाले कुल 215226 किशोर और किशोरियों में 60 प्रतिशत किशोर और 40 फीसदी किशोरियां हैं। 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए अब तक ज्यादातर टीकाकरण केंद्र स्कूल, कॉलेजों में ही बनाए गए हैं। जबकि 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग में अब तक 4731 बच्चों को टीका लगाया गया है। इनमें छात्राओं का प्रतिशत करीब 32 है।
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शिविरों में बढ़-चढ़ कर भाग ले रहीं छात्राएं
छात्राओं का कहना है कि उनमें टीकाकरण को लेकर किसी तरह का भय या भ्रांति नहीं है। स्कूल कॉलेज में जब टीकाकरण शिविर लगता है तो वे भी छात्रों की तरह टीकाकरण में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। लड़कों के मुकाबले लड़कियों का टीकाकरण में कुछ पीछे होने का एक कारण यह भी है कि टीकाकरण शिविरों की संख्या सीमित है। बोर्ड परीक्षाओं के कारण इंटर कॉलेजों में इन दिनों शिविर नहीं लग रहे। छात्रा नीरज, आरती, शिल्पी शर्मा आदि से बात करने पर उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए स्कूल-कॉलेजों में ही टीकाकरण सुविधाजनक है। टीकाकरण केंद्रों तक जाने में असुविधा होती है। जिस तरह 15 से 17 वर्ष के छात्र-छात्राओं का टीकाकरण स्कूल कॉलेजों में किया गया। उसकी तरह से नियमित शिविर लगातार 12 से 14 वर्ष के छात्र-छात्राओं का भी टीकाकरण होना चाहिए।
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अभिभावकों ने कहा-नहीं की बच्चों को टीका लगवाने में लापरवाही
बच्चों का टीकाकरण करवाना हर अभिभावक की जिम्मेदारी है, इसको समझते हुए जैसे ही बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ तो अपने बच्चों को टीका लगवा दिया। बच्चों के टीके में लापरवाही ठीक नहीं है।
- दिलीप शर्मा
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यह बात सही है कि कुछ बच्चे टीकाकरण से डरते हैं, लेकिन उनकी काउंसिलिंग की जाए तो वह टीका लगवा लेते हैं। मेरे बच्चे भी पहले कुछ झिझक रहे थे, लेकिन उनको समझाया तो टीका लगवा लिया।
-आरती
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लड़कियों ने कहा-टीका लगवाने में डर कैसा
छात्राएं टीकाकरण को लेकर बिल्कुल नहीं डर नहीं। वह जागरूक हैं, अपनी बारी आने पर टीका लगवा रही हैं। स्कूल-कॉलेजों में नियमित टीकाकरण शिविर लगें तो छात्राएं टीकाकरण में आगे निकल जाएंगी।
-ध्वनि
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स्कूल-कॉलेजों में जब भी टीकाकरण शिविर लगता है तो छात्राएं टीकाकरण में पीछे नहीं रहतीं। स्कूलों में छात्राओं की काउंसिलिंग भी की जाती है। टीकाकरण से डरने की कोई जरूरत नहीं, सब सकारात्मक है।
-मुस्कान
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टीकाकरण में छात्राएं पीछे नहीं हैं। यह बात गलत है कि लड़कों के मुकाबले लड़कियों में भय और भ्रांति का माहौल है। लड़कों के मुकाबले लड़कियां भी कम टीकाकरण नहीं करा रहीं। बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं।
-खुशी
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घर में दादा-दादी, मां-पिताजी, भाई, चाचा-चाची सभी को टीका लग चुका है। 15 से 17 साल की उम्र वालों की टीके की बारी आई तो मैं भी पीछे नहीं रहा और टीकाकरण करवा लिया। कोई समस्या नहीं हुई।
-शनि
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टीकाकरण को लेकर किसी तरह का डर पालने की जरूरत नहीं है। टीका लगने के बाद काफी सकारात्मक महसूस होता है। बड़ों को ही नहीं किशोर-किशोरियों को भी टीके को लेकर जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
-रुद्र वैश्य
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स्कूल में सीनियर्स को टीका लग चुका था। 12 से 14 वर्ष के बच्चों की बारी आई तो अच्छा लगा। स्कूल में टीकाकरण शिविर लगा तो मैंने भी पहला टीका लगवा लिया। परिवार में सभी को टीका लग चुका है।
-अर्थव शर्मा
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टीकाकरण के मामले में 15 से 17 और 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग में छात्रों के मुकाबले छात्राओं की संख्या भी संतोषजनक है। स्कूल-कॉलेजों में लगने वाले टीकाकरण शिविरों में छात्राएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रबंधन काउंसिलिंग भी कर रहा है। टीकाकरण की रफ्तार संतोषजनक है।
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- डॉ. मोहम्मद असलम, एसीएमओ/नोडल अधिकारी टीकाकरण
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