फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुखार से दो और लोगों की मौत, 15 लोग बीमार

विज्ञापन
बसोमा में मरीज का ब्लड सैंपल लेते लैब टैक्नीशियन। - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
उझानी (बदायूं)। बसोमा और वरामालदेव गांव में बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों गांवों में शिविर लगाकर मरीजों की जांच कर उन्हें दवाएं बांटीं। इस दौरान वरामालदेव में बुखार के 15 नए मरीज मिले तो बसोमा में पांच दिन से बीमार दो बुजुर्ग महिलाओं की मौत हो गई।
विज्ञापन

बसोमा और वरामालदेव गांवों में पिछले आठ-नौ दिनों से बुखार के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बसोमा निवासी रामकली (65) पत्नी स्व. वीरपाल और रामवती (60) पत्नी श्रीपाल को पांच दिन पहले बुखार आया। परिवार ने निजी क्लीनिक पर इलाज कराया। दो दिन पहले श्रीपाल भी बुखार की चपेट में आ गए। रामकली और रामवती की सोमवार सुबह मौत हो गई। ग्रामीणों में सत्यदेव, सुग्रीव, अशोक कुमार गिरीश, निर्दोष और संजू सिंह बुखार की चपेट में हैं। बसोमा में लगे शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य महेश गौतम ने बताया कि छह लोगों के खून का नमूना लेकर जांच किया गया तो मलेरिया का कोई मरीज नहीं निकला।
वरामालदेव में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गिरीश पाल सिंह सिसोदिया की सूचना के बाद मंगलवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. प्रभाकर मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने शिविर लगाकर लोगों की जांच की। मलेरिया का हालांकि कोई मरीज नहीं मिला लेकिन अधिकतर को वायरल की पुष्टि हुई। यहां महिलाओं समेत आठ लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। यहां बता दें कि चार दिन पहले वरामालदेव के तीन बच्चों समेत 10 लोगों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत अब ठीक है। पिछले दिनों बुखार से ही वरामालदेव के रोहन मौर्य, बसोमा निवासी सोमेश, गंगा सिंह और उस्मान की मौत हो चुकी है। निजी चिकित्सकों ने तीन में डेंगू के लक्षण बताए थे लेकिन सरकारी स्तर से इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।
विज्ञापन

वरामालदेव और बसोमा में बुखार के मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। स्थानीय स्तर से रोज ही दोनों गांव में टीम भेजकर मरीजों को दवाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं। बुखार के मरीजों के खून का सैंपल लेकर चेकअप भी कराया गया है। जिन दो महिलाओं की बुखार से मौत बताई गई है, वह काफी बुजुर्ग थीं। उनकी मृत्यु स्वभाविक रूप से हुई है।
विज्ञापन

- डॉ. निरंजन सिंह, चिकित्साधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें