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अब हार की समीक्षा, एमएलसी चुनाव के बाद गिर सकती है कई नेताओं पर गाज

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बदायूं। विधानसभा चुनाव निपटने के बाद राजनीतिक दलों खासकर भाजपा और सपा ने हार की समीक्षा शुरू कर दी है। चुनाव से पहले भाजपा जिले की सभी छह सीटों पर कब्जा करने का दावा कर रही थी, लेकिन चुनाव परिणाम आए तो शेखूपुर और बिसौली सीट भाजपा गंवा बैठी। शहर, बिल्सी और दातागंज सीट ही भाजपा बचा सकी। इधर, सपा में भी भितरघात हुआ। दातागंज प्रत्याशी कैप्टन अर्जुन ने पार्टी नेताओं पर ही हरवाने का आरोप लगा दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद अब यह दोनों दल समीक्षा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एमएलसी चुनाव के बाद सपा और भाजपा भितरघातियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।
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विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा ने जिले की छह में से पांच सीटों पर कब्जा किया था। सहसवान सीट सपा के खाते में गई थी। इस बार भाजपा को सभी छह सीटों पर जीत की उम्मीद थी। पार्टी ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। मुख्यमंत्री की सहसवान, वजीरगंज, दातागंज में सभाएं हुईं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस्लामनगर और शहर में डोर टू डोर जनसंपर्क कर वोट मांगे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कई सभाएं कीं, इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। इसके बावजूद भाजपा छह में से तीन सीटें ही जीत सकी। दो सीटें पार्टी ने गंवा दीं। सपा की ओर से प्रचार पर ज्यादा जोर नहीं रहा, लेकिन पार्टी संगठन धरातल पर जुटा रहा। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव भी बदायूं में डेरा डाले रहे।
चुनाव प्रचार थमने से एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी दो जनसभाएं कीं। सपा को कामयाबी मिली, पार्टी तीन सीटें जीतने में कामयाब हो गई, लेकिन दातागंज सीट पर सपा की हार पार्टी नेताओं के गले नहीं उतर रही। दो दिन पहले दातागंज पहुंचे पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव के सामने ही सपा प्रत्याशी रहे कैप्टन अर्जुन ने पार्टी नेताओं पर भितरघात कर हरवाने का आरोप लगा दिया। दोनों पार्टियां अब जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक हार-जीत की समीक्षा कर रही हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि एमएलसी चुनाव के बाद दोनों पार्टियों में भितरघातियों पर गाज गिर सकती है। इनमें जिले के कुछ बड़े नेता भी शामिल हैं।
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वोट ज्यादा मिले, फिर भी नहीं बची शेखूपुर और बिसौली सीट
भाजपा से शेखूपुर सीट पर प्रत्याशी रहे धर्मेद्र शाक्य को 2017 के चुनाव के मुकाबले इस बार ज्यादा वोट मिले। बिसौली सीट से प्रत्याशी कुशाग्र सागर को भी पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार ज्यादा वोट मिले। इसके बावजूद दोनों प्रत्याशी फिर से विधानसभा नहीं पहुंच सके। पार्टी ने दोनों सीटों पर हार की समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी हाईकमान इसे लेकर प्रत्याशियों से भी बात कर रही है।
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पार्टी प्रत्याशियों को वोट ज्यादा मिले हैं। भाजपा प्रत्याशियों ने सभी छह सीटों पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ा। शेखूपुर, बिसौली और सहसवान सीट पर हार की समीक्षा की जा रही है। इन सीटों पर प्रत्याशी किन कारणों से हारे यह समीक्षा के बाद ही कहा जा सकता है। प्रत्याशियों से भी बात की जा रही है। पार्टी हाईकमान स्तर से समीक्षा हो रही है।
-राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
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सभी छह सीटों पर सपा प्रत्याशियों को 2017 के चुनाव से ज्यादा वोट मिले हैं। 2017 में हमने एक सीट जीती थी, लेकिन इस बार तीन सीटें जीती हैं। दातागंज सीट पर हार को लेकर जिस तरह के आरोप लग रहे हैं उनको मैं नहीं मानता। पूरे संगठन ने मिलकर सभी प्रत्याशियों को लड़ाया है। हार किन करणों से हुई उसकी समीक्षा की जा रही है। आरोप-प्रत्यारोप ठीक नहीं हैं।
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-प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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