गांव में 157 परिवारों के पास नहीं हैं शौचालय
ब्लाक म्याऊं के गांव चितौरा धनौरा के लगभग आधे परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। नतीजतन, ग्रामीण खुले में शौच को जाने के लिए विवश हैं। महिलाएं भी खेतों में ही शौच को जाती हैं। लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में 347 परिवार रहते हैं। इनमें से अब तक केवल 190 परिवारों के लिए ही निर्मल भारत और स्वच्छ भारत अभियान में शौचालय बनवाए गए हैं। बाकी परिवारों के सामने खुले में शौच के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
पंचायत राज विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2010 गांव में 112 शौचालय बनाए गए थे। इसके बाद के छह साल में अब तक मात्र 78 शौचालय ही बनवाए गए। इस समय गांव में बने शौचालयों की संख्या 190 है। अमर उजाला की टीम ने जब इस गांव का दौरा किया तो गांव के पास ही सड़क किनारे कुछ महिलाएं बैठीं आपस में बात कर रहीं थीं। जब इनसे शौचालय के बारे में पूछा गया तो धनदेवी पत्नी मुन्नालाल, शांति देवी पत्नी जगदीश, आरती पत्नी बृजेश, राजवती पत्नी शिवनरायन और सुंदरवती पत्नी नेतराम ने बताया कि उनके घरों में शौचालय हैं नहीं। बोलीं कि वे गरीब हैं इसलिए खुद शौचालय नहीं बनवा पाए हैं। मजबूरी में शौच करने खुले में जाना पड़ता है। कई बार तो बहुत शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। वहीं, गांव की प्रेमादेवी पत्नी रामसेवक ने बताया कि रात के समय शौच के लिए मोहल्ले की महिलाएं झुंड के रूप में जाती हैं ताकि कोई अनहोनी न जाए।
गांव के आचार्य बालकृष्ण उर्फ नंद किशोर सारस्वत बताते हैं कि तमाम गरीब परिवारों में अर्थिक तंगी के चलते शौचालय नहीं बन पा रहे हैं इसलिए सब सरकारी योजनाओं के भरोसे हैं लेकिन सरकारी योजना पात्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ग्राम प्रधान फैनसिंह ने बताया कि वह गांव में शौचालय बनवाले के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए प्रस्ताव भेजा है। विगत दिनों गांव के 25 लोगों को शौचालय बनाने के लिए धनराशि मुहैया कराई है।