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बारिश से धान को सर्वाधिक क्षति, सरसों और लाही पर भी असर

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बारिश से प्रभावित धान की फसल। - फोटो : BADAUN
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उझानी / बदायूं। बारिश से अधिकतर खेतों में जलभराव ने हाल ही में बोए गए आलू और चार-पांच दिन पहले बोई गई सरसों, लाही की फसलों को चपेट में ले लिया है। इसके अलावा धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। इसमें पूसा बासमती की तीनों प्रजातियों के अलावा धान-1121 और हाईब्रिड खेतों में गिर गया है।
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इस्लामनगर, सहसवान, कादरचौक, बिसौली, बिल्सी, उझानी, दातागंज में सोमवार को भी भारी बारिश हुई। जिससे कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल चौपट हो गई।
उझानी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि धान की फसल इन दिनों कुछ हद तक पक चुकी है तो अधिकतर रकबे में पकने को तैयार है। जिले में पूसा बासमती की तीन प्रजातियों के अलावा धान-1121 और हाईब्रिड ज्यादातर खेतों में है। हाईब्रिड प्रजातियों के धान की पैदावार अन्य प्रजाति के मुकाबले अधिक होती है। बारिश के दौरान तेज हवा चलने से धान की फसल खेत में गिर गई है। दानों में कंडुआ रोग लग जाने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। बारिश की चपेट में आई अन्य फसलों में नुकसान तो उन किसानों को भी हुआ है, जिनकी चार-छह दिन पहले बुआई की गई है। सरसों और लाही के उगने पर भी संकट मंडराने लगा है।
आलू का बीज खेतों में सड़ सकता है। बाजरा और उड़द भी बारिश से प्रभावित हुआ है। सब्जी फसलों में जलभराव ज्यादा नुकसानदायक साबित होगा। किसानों में हरिओम ने बताया कि मौसम की मार ने धान की फसल से लागत निकलने पर सवाल खड़ा हो गया है।
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बिल्सी। दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने किसानों की खेतों में कटी पड़ी धान और बाजरा की फसल को बर्बाद कर दिया है। इसके कारण किसान बेहद परेशान दिखाई दे रहे हैं। संवाद
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