एनआईसीयू में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से बच्चे की जान पर बनी
-तीन घंटे बिजली ठप रहने के कारण पाइप लाइन में ऑक्सीजन नहीं पहुंची
-हंगामे के दौरान पहुंचे सीएमओ, तब भी नहीं चला जनरेटर
ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 50 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद भी बदायूं का स्वास्थ्य महकमा नींद में है। शनिवार दोपहर जिला महिला अस्पताल के नवजात सघन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में बिजली सप्लाई ठप होने के बाद करीब तीन घंटे तक जनरेटर नहीं चला। इससे पाइप लाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई। ऐसे में सिलेंडर से वहां भर्ती एक बच्चे को ऑक्सीजन दी गई। बच्चों की जान को खतरे में देखकर इस बीच परिवार वालों ने हंगामा भी किया।
एनआईसीयू में शनिवार को तीन नवजात भर्ती थे। हालत में सुधार होने पर दो नवजात को शनिवार सुबह यहां से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। इसके बाद सालारपुर ब्लॉक के गांव पड़ौलिया निवासी विशंभर का नवजात बेटा ही रह गया था। दोपहर करीब दो बजे बिजली सप्लाई ठप होने के बाद जनरेटर नहीं चलाने से पाइप लाइन में ऑक्सीजन आना बंद हो गई। यह जानने के बाद परिवार के लोगों ने हंगामा कर दिया। पता चलने पर सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा मौके पर वहां पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद भी जनरेटर नहीं चला तो उन्होंने महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी को बुलवाया गया। पता लगा कि सीएमएस अस्पताल में नहीं हैं। इस पर उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को समझाने की कोशिश की, मगर कोई हल न निकलने के कारण लोगों में अव्यवस्थाओं को लेकर गुस्सा बढ़ता चला गया। इस बीच सिलेंडर मंगाकर बच्चे को ऑक्सीजन दी गई। शाम करीब पांच बजे बिजली सप्लाई चालू होने पर हालात सामान्य हुए।
वर्जन-
सघन नवजात चिकित्सा इकाई में जनरेटर बंद होने की सूचना मिली थी। इस पर मैं मौके पर गया था। इस बारे में महिला अस्पताल की सीएमएस से बात की जाएगी। जिला अस्पताल में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम को दुरुस्त कराने के लिए भी जिला अस्पताल के सीएमएस को लिखा जाएगा। इन अव्यवस्थाओं के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
---------------------------------------------------------------------------------------
हवा में उड़ गए 1.10 करोड़, मरीजों को ऑक्सीजन नहीं
जिला अस्पताल का सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम ठप हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला अस्पताल का सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम तीन साल से ठप है। करीब 1.10 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए इस सिस्टम का काफी सामान भी चोरी हो चुका है। जिला अस्पताल प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं है। मरीजों को समय से ऑक्सीजन नहीं मिलती। सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम को दुरुस्त कराने के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। कई बार जिला अस्पताल की इमरजेंसी भी बिना ऑक्सीजन के चली है। हालात यह हैं कि 1.10 करोड़ रुपये हवा में उड़ गए हैं।
जिला अस्पताल में 300 बेड की सुविधा है। करीब पांच साल पहले यहां इमरजेंसी वार्ड समेत सभी वार्डों में बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम लगाया गया था। इस पर 1.10 करोड़ रुपये का खर्च भी आया। कुछ दिन चलने के बाद ही यह सिस्टम ठप हो गया। ताजा हालात में इमरजेंसी समेत सभी वार्ड के बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम का सिर्फ बॉक्स नजर आ रहा है। लंबे समय से बेड तक ऑक्सीजन पहुंच ही नहीं रही। कई बार ऑक्सीजन समय से न मिलने पर मरीजों की जान पर बन आती है। लापरवाही का आलम यह है कि कई बार तो इमरजेंसी भी ऑक्सीजन के खाली सिलेंडर के सहारे चलती है। जिम्मेदार अफसर गोरखपुर कांड के बाद भी नहीं चेते हैं।
बाक्स
300 बेड के अस्पताल में सिर्फ 29 ऑक्सीजन सिलेंडर
बदायूं। जिला अस्पताल 300 बेड का है। गौर करने वाली बात यह है कि यहां ऑक्सीजन के सिर्फ 29 सिलेंडर हैं। जिला अस्पताल में इस समय भर्ती मरीजों की संख्या 289 है। ऐसे में 29 सिलेंडर नाकाफी हैं। जिन सिलेंडर के सहारे जिला अस्पताल चल रहा है उनमें एक सिलेंडर के जरिए एक बार में सिर्फ एक ही मरीज को ऑक्सीजन दी जा सकती है। इन अव्यवस्थाओं के बारे में बात करने पर जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. प्रवीना माहेश्वरी सिर्फ इतना बताया कि एक सिलेंडर भरवाने पर 350 रुपये का खर्च आता है। प्रति महीने जिला अस्पताल में 25 सिलेंडर खत्म हो जाते हैं।
बाक्स
52 करोड़ खर्च होने के बाद भी 24 घंटे बिजली नहीं
बदायूं। जिला और जिला महिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली सप्लाई के लिए 2014 में 52 करोड़ रुपये की लागत से विद्युत सब स्टेशन स्थापित किया गया था। कुछ दिन चलने के बाद इस सब स्टेशन से बिजली सप्लाई ठप हो गई। अस्पताल में अब स्पेशल फीडर के जरिए बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है। अगर 52 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित स्पेशल फीडर काम कर रहा होता तो मरीजों को दिक्कत न होती।
बाक्स
नौ दिन में हो चुकी तीन नवजात की मौत
बदायूं। करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित नवजात सघन चिकित्सा इकाई में लापरवाही का आलम यह है कि नौ दिन में यहां भर्ती तीन नवजात की मौत हो चुकी है। पर्याप्त संसाधन और स्टाफ होने के बाद भी इस तरह से नवजातों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने को तैयार नहीं है।