बदायूं। भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है। जल संरक्षण और संचय पर किसी का ध्यान नहीं है। लगातार भूगर्भ जलस्तर गिरने के कारण जिले के तीन ब्लॉकों अंबियापुर, आसफपुर और इस्लामनगर डार्क जोन में पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं कादरचौक, सहसवान, बिसौली, म्याऊ, जगत, उझानी और सालारपुर ब्लॉक भी सेमी डार्क जोन में आ गए हैं। जलस्तर गिरने का मुख्य कारण वर्षा के जल को संचय करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर ध्यान न देना है।
खिसकते भूगर्भ जलस्तर को बचाने के लिए सरकार तालाबों, पोखरों के साथ नदियों के पुनर्जीवन पर करोड़ों का बजट खर्च कर रही है, लेकिन हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। जलस्तर गिरने के कारण शहर से सोत, महावा, अरिल और भैंसोर नदियां सूख गईं हैं। इन नदियों में बारिश के दिनों में ही कुछ पानी दिखता है। सैकड़ों की संख्या में तालाब भी सूख चुके हैं। तीन ब्लॉक डार्क और सात सेमी डार्क जोन में जाने से भविष्य में जल संकट का खतरा साफ दिखाई दे रहा है।
लघु सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार पांच साल में आसफपुर, अंबियापुर और इस्लामनगर ब्लॉक में जलस्तर चार से पांच मीटर तक गिरा है। यहां अब पानी 13 से 15 मीटर पर मिल रहा है। सेमी डार्क जोन में आए कादरचौक, सहसवान, बिसौली, म्याऊ, जगत, उझानी और सालारपुर ब्लॉक में पानी नौ से 11 मीटर पर मिल पा रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि सामान्य श्रेणी में शामिल दातागंज, समरेर, उसावां, दहगवां और वजीरगंज ब्लॉक में भूगर्भ जल पांच से आठ मीटर पर मिल जा रहा है। सबसे खराब स्थिति डार्क जोन में शामिल आसफपुर ब्लॉक की है। यहां पानी कई स्थानों पर 18 मीटर गहराई तक नहीं मिल पा रहा। जल संरक्षण और संचय के ठोस उपाय न होने के कारण सेमी डार्क जोन में पहुंचे सात ब्लॉकों में भी लगातार जलस्तर गिरता जा रहा है।
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भूगर्भ जल रिचार्ज न होने से बड़ी नदियों, वेटलैंड्स पर भी संकट
अंधाधुंध दोहन के कारण भूगर्भ जलस्तर लगातार गिर रहा है। तेजी से गिरते भूगर्भ जल स्तर का एक बड़ा कारण नदियों का सूखना भी है। अरिल, सोत, महावा, भैंसोर नदियां सूख चुकी हैं। रामगंगा की स्थिति भी अच्छी नहीं है। सैकड़ों एकड़ में फैली कादरचौक की नाहरगोर और नूरपुर झीलों और सहसवान में सरसोता झील का अस्तित्व भी खत्म हो गया है। वर्षा जल संचय के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसके कारण भूगर्भ जलस्तर रिचार्ज नहीं हो रहा है। गंगा, रामगंगा के इलाकों में वेटलैंड्स भी सूख रहे हैं। वन विभाग के रिकार्ड में जिले में 138 वेटलैंड्स हैं, लेकिन इनमें 10-12 वेटलैंड्स ही ऐसे बचे हैं, जहां कुछ पानी और दलदली जमीन है। वेटलैंड्स के सूखने के कारण सर्दियों के सीजन में जिले में प्रवास को आने वाले विदेशी पक्षियों की संख्या भी कम हुई है।
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दो साल से डार्क जोन ब्लॉकों में नहीं हुआ कोई काम
डार्क जोन में पहुंचे आसफपुर, अंबियापुर और इस्लामनगर ब्लॉक में दो साल से भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए कोई काम नहीं हुआ है। लघु सिंचाई विभाग ने यहां भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे थे, लेकिन इनको मंजूरी का अब तक इंतजार है। मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के तहत भी शासन को प्रस्ताव भेजे गए। इनके लिए भी बजट नहीं मिल सका। दो साल से वाटर रिचार्ज के लिए कोई काम न होने के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
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छोटी नदियों पर चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव भी लटका
वर्षा जल संचय के लिए लघु सिंचाई विभाग ने अरिल, सोत और महावा नदियों पर चैक डैम निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिले में कुल आठ चेक डैम का निर्माण होना है। एक चेक डैम पर करीब 37 लाख का खर्च जाएगा। चेक डैम के प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के तहत भेजे गए थे। लघु सिंचाई विभाग के अभियंता कामेंद्र सिंह ने बताया कि इनको अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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अंबियापुर, इस्लामनगर और आसफपुर ब्लॉक डार्क जोन में हैं। कादरचौक, सहसवान, बिसौली, म्याऊ, जगत, उझानी और सालारपुर ब्लॉक में भी भू-गर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यह सात ब्लॉक सेमी डार्क जोन में आ चुके हैं। डार्क जोन में शामिल ब्लॉकों में नलकूप के बोरिंग पर रोक लगाई जा चुकी है। डार्क जोन ब्लॉकों में भूगर्भ जलस्तर 18 मीटर तक नीचे जा चुका है। जल संरक्षण और वर्षा जल संचय को लेकर लोगों को गंभीर होना होगा।
- कामेंद्र सिंह, अवर अभियंता, लघु सिंचाई विभाग