शव मिलने के बाद गंगा किनारे जुटे ग्रामीण
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बदायूं के सहसवान क्षेत्र में ट्यूब पर बैठकर गंगा पार कर करते समय रविवार को दंपती डूब गए। सोमवार की सुबह कुछ लोग मछली पकड़ने गए तो दंपती के शव गंगा में उतराते हुए दिखे। ग्रामीणों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। उन्होंने घटना के संबंध में जानकारी की।
कोतवाली के गांव औरंगाबाद टप्पा जामनी के मजरा मोहन नगला निवासी धर्म सिंह की गंगा पार कृषि भूमि है। रविवार दोपहर धर्मसिंह (50) अपनी पत्नी शांति (48) के साथ खेत पर जा रहे थे। वह दोनों ट्यूब पर बैठकर गंगा पार कर रही रहे थे कि संतुलन बिगड़ने से डूब गए। जानकारी होने के बाद परिजन ग्रामीणों के साथ गंगा किनारे पहुंचे। दोनों की तलाश शुरू कर दी, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल सका।
सोमवार की सुबह गांव के ही कुछ लोग गंगा में मछली पकड़ने के लिए पहुंचे। उन्होंने दंपती के शवों को गंगा में उतराते हुए देखा तो परिजनों और ग्रामीणों को बुला लिया। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला गया।
परिवार में मचा कोहराम
सूचना पर पुलिस के अलावा नायब तहसीलदार जितेंद्र सिंह, राजस्व निरीक्षक बृजपाल सिंह मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम को भेज दिया। दंपती की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। बता दें कि दंपती के नौ बच्चे हैं। इनमें पांच पुत्र और चार पुत्रियां हैं। दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है। शेष बच्चे अविवाहित हैं। मेहनत मजदूरी से इनके परिवार का भरण पोषण होता था।
जान जोखिम में डालकर रोज पार करते थे गंगा
सितंबर में आई बाढ़ ने धर्म सिंह की रोजी रोटी को संकट में डाल दिया। गंगा के दूसरे छोर में धर्म सिंह की 11 बीघा जमीन हाल ही में आई बाढ़ में कट गई थी। अब वह सीख मूझ से बान बनाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे।
धर्म सिंह परिवार के साथ ईंट भट्ठों पर रहकर भी मेहनत मजदूरी करते थे, लेकिन उनके सामने संकट था कि अभी ईंट भट्ठे चालू नहीं हुए थे। ऐसे में रोजी रोटी का इंतजाम भी करना था तो उन्होंने गंगा पार करके सीख मूझ लाकर बान बनाने शुरू कर दिए थे।
इसके लिए हर रोज जान जोखिम में डालकर ट्यूब से गंगापार करते थे। कई बार पत्नी को भी साथ ले जाते थे। धर्म सिंह के पास इतने रुपये नहीं थे कि वह गंगा पार करने के लिए नाव की व्यवस्था कर पाते। ऐसे में दोनों पति पत्नी आए दिन ट्यूब पर ही बैठकर गंगा पार करते थे।