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सिर्फ एक महिला और एक बाल रोग विशेषज्ञ के सहारे रही ओपीडी

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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में लगी लाइन। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को लाइन रही रही। इस दौरान सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हुई। दरअसल, ओपीडी से मंगलवार को ज्यादातर डॉक्टर नदारद रहे। ओपीडी में डॉक्टरों के नाम पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार वासु और डॉ. रबिया ही दिखीं। ओपीडी में दिन भर अव्यवस्था रही।
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जिला महिला अस्पताल में व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ रहीं। कहने को तो अस्पताल में 11 डॉक्टर हैं। इनमें तीन महिला और दो बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन सौ से अधिक गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं। इसके अलावा सामान्य स्त्री रोग की समस्या से ग्रस्त महिलाएं और बच्चों की बड़ी संख्या रहती है। इनमें नवजात भी शामिल हैं। पिछले दिनों भीषण गर्मी के बाद अब मौसम में बदलाव आया है। मौसम में बदलाव के कारण रोगों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। वायरल बुखार, पेट संबंधी बीमारियों का शिकार बच्चे ज्यादा हो रहे हैं।
बदलते मौसम में बढ़ रहे बीमारियों के प्रकोप के बीच जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में भी मनमानी हो रही है। मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे तक जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में 65 गर्भवती महिलाओं के ब्लड प्रेशर की जांच की गई, इसमें 40 से ज्यादा महिलाओं को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत थी, इन महिलाओं को भी लाइन में लगकर डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को ओपीडी में माताओं के साथ पहुंचने वाले बच्चों की संख्या भी अच्छी थी। डॉ. कुमार वासु और डॉ. राबिया के कक्षों के बाहर दिन भर लाइन लगी रही।
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भ्रष्टाचार के कई मामलों में लटकी है जांच
जिला महिला अस्पताल में भ्रष्टाचार के कई मामलों में जांच भी पूरी नहीं हो पा रही। नियम विरुद्ध नियुक्त मामले में सीमएस डॉ. रेखा रानी के खिलाफ भी शासन स्तर से जांच चल रही है। तीन अन्य डॉक्टरों पर भी वसूली के आरोप लगे हैं। इस मामले में जांच भी एडी हेल्थ कर रहे हैं। गौर करने की बात यह है कि अस्पताल में तैनात कई संविदा के डॉक्टर निजी नर्सिंगहोम और क्लीनिक चलाते हैं। यह डॉक्टर अस्पताल में समय देने के स्थान पर अपने निजी प्रतिष्ठानों पर ज्यादा समय देते हैं। अस्पताल आने वाले रोगियों को भी अपने अस्पतालों पर बुलाते हैं। इसका सीधा असर सरकारी चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखता है।
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जिला महिला अस्पताल के संबंध में कई बार शिकायतें मिलती हैं। इनके संबंध में एडी हेल्थ को अवगत करा दिया जाता है। एडी हेल्थ के स्तर से कई मामलों में जांच भी की जा रही है। महिला अस्पताल की सीएमएस से व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए मेरे स्तर से कई बार कहा जा चुका है।
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-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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