पूर्व विधायक योगेंद्र सागर। फाइल फोटो (बदायूं से)
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बदायूं। मंगलवार को पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को अस्थायी बैरक से जेल की ही 12 नंबर बैरक में भेज दिया गया। इस बैरक में उसकी आरटीपीसीआर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही उसे जेल के ही अंदर दूसरी बैरक दी जाएगी।
पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को शनिवार दोपहर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सागर बिल्सी की छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी साबित हुआ था। इस मामले में शामिल तेजेंद्र सागर और नीरज शर्मा उर्फ मीनू को छह साल पहले ही सजा हो चुकी है। पूर्व विधायक को 30 अक्तूबर को सजा सुनाई गई। इसके बाद वह जेल की अस्थायी बैरक में रखा गया था। उसका प्राथमिक मेडिकल चेकअप कराया गया, जिसमें ब्लड प्रेशर और शुगर होने की बात कही गई। इसके अलावा उसका रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से जांच कराई गई। इसमें वह कोरोना निगेटिव निकला लेकिन अभी उसकी आरटीपीसीआर जांच नहीं कराई गई।
मंगलवार दोपहर बाद उसे अस्थायी बैरक से जेल के अंदर 12 नंबर बैरक में शिफ्ट कर दिया गया। जेल प्रशासन के मुताबिक यहां उसकी आरटीपीसीआर जांच कराई जाएगी। अगर इसमें भी वह निगेटिव आता है तो उसे दूसरी बैरक में शिफ्ट कर दिया जाएगा। 12 नंबर बैरक भी क्वांरटीन बैरक है। जेल के अंदर नए कैदियों को इसी बैरक में रखा जाता है।
पीड़ित परिवार के सामने है अभी तीन और मामलों की चुनौती
शनिवार को छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार के सामने तीन मामले और चुनौती के रूप में हैं। पीड़ित परिवार के मुताबिक उनके खिलाफ जानलेवा हमले के ही अलग-अलग पांच मामले दर्ज कराए गए थे। उनमें दो पुलिस खत्म कर चुकी है। एक में एफआर लगाई गई। जबकि एक में उन्होंने स्टे ले लिया गया है। जानलेवा हमले के एक मामले में बड़े भाई और पिता को पांच-पांच साल की सजा हो चुकी है। पुलिस ने गुंडा एक्ट लगाई थी। वह भी खत्म हो गई। अब एक गैंगस्टर का मामला और एक लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में निर्णय आने के बाद परिवार को उम्मीद है कि इन केस में कहीं न कहीं लाभ जरूर मिलेगा लेकिन इसके लिए भी उन्हें काफी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।