बदायूं। मलेरिया के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग के साथ प्रशासन भी ज्यादा गंभीर हो गया है। मलेरिया के प्रकोप और डेंगू के खतरे के मद्देनजर अब जिले में 35 टीमों को घर-घर लार्वा खोजने और उसे नष्ट करने के लिए लगाया गया है। शुक्रवार को भी जिले में मलेरिया के 30 नए रोगी मिले हैं। इनमें दो को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई है। शुक्रवार को शहर में घर-घर लार्वा खोजा गया। इस दौरान 42 घरों में मच्छरों का लार्वा पाया गया, इसे नष्ट कर दिया गया।
जिले में करीब 15 दिन से वायरल फीवर का प्रकोप बना हुआ है। अब तक करीब 250 गांव वायरल फीवर की चपेट में आ चुके हैं। शुक्रवार को मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में 17 स्थानों पर कैंप लगवाकर बुखार पीड़ितों की जांच कराई गई तो 30 रोगी मलेरिया के निकले। इनमें दो रोगियों को जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई है। फैल्सीपेरम मलेरिया का एक रोगी सालारपुर और एक रोगी दातागंज ब्लॉक में मिला है। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर शुक्रवार को मलेरिया से ज्यादा प्रभावित 21 गांवों में मच्छरनाशक स्प्रे कराया गया। इसके साथ ही 270 गांवों में डीडीटी के घोल का भी छिड़काव कराया गया। इस दौरान 67 तालाबों में गंबूजिया मछलियां भी छुड़वाई गई हैं। शुक्रवार को अलग-अलग स्थानों पर कुल 1176 लोगों की जांच कर दवाओं का वितरण किया गया।
शुक्रवार को मलेरिया विभाग की टीमों ने शहर के कई मोहल्लों में घर-घर जाकर मच्छरों का लार्वा तलाश किया। इस दौरान 42 घरों में कूलर और फ्रिज की ट्रे के साथ गमलों में भरे पानी में मच्छरों का लावा पाया गया। लार्वा नष्ट करने के बाद इन सभी लोगों को नोटिस दिया गया है।
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मलेरिया के 222, फैल्सीपेरम के छह सक्रिय रोगी
मलेरिया के लिहाज से बदायूं के दातागंज, समरेर, जगत और सालारपुर ब्लॉक हाईरिस्क श्रेणी में शामिल हैं। इस वर्ष सबसे ज्यादा मामले सालारपुर ब्लॉक में सामने आए हैं। जनवरी से अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में करीब 85 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। इनमें अब तक 894 मलेरिया और 59 फैल्सीपेरम मलेरिया के रोगी मिल चुके हैं। अब तक मलेरिया से किसी की मौत नहीं हुई है। डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है। जिले में मलेरिया के 222 और फैल्सीपेरम मलेरिया के छह सक्रिय रोगी अब भी हैं।
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अस्पतालों में वायरल फीवर के रोगियों की संख्या ज्यादा
सरकारी अस्पतालों के साथ निजी डॉक्टरों के पास पहुंचने वाले रोगियों में इन दिनों वायरल फीवर के रोगियों की संख्या जयादा है। जिला अस्पताल की ओपीडी की बात करें तो यहां प्रतिदिन 12 से 14 सौ रोगी पहुंच रहे हैं। इन रोगियों में 80 फीसदी वायरल फीवर के रोगी हैं। जिला अस्पताल समेत जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी पर इन दिनों मरीजों की काफी भीड़ उमड़ रही है।
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बुखार से होमगार्ड की बेटी की मौत
उसावां। जिले में बुखार से मौत का पहला मामला उसावां क्षेत्र में सामने आया है। गांव बीरमपुर भदेली के मजरा रसूलपुर में होमगार्ड की बेटी की बुखार से शुक्रवार रात बरेली ले जाते वक्त मौत हो गई। परिवार के लोग देर रात उसका शव लेकर गांव लौट आए।
क्षेत्र के गांव रसूलपुर निवासी हीरालाल थाने में होमगार्ड हैं। उनकी सात वर्षीय पुत्री वर्षा को पांच दिन से बुखार आ रहा था। उसका कस्बे में ही निजी क्लीनिक में इलाज चल रहा था। शुक्रवार को ज्यादा हालत खराब होने पर डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। तब परिजन वर्षा को इलाज के लिए बरेली ले जा रहे थे। रात दस बजे रामगंगा के पास रास्ते में बच्ची की मौत हो गई। परिवार के मुताबिक डॉक्टर ने बच्ची को वायरल बुखार बताया था। संवाद
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पिछले वर्ष के मुकाबले मलेरिया के कम रोगी मिल रहे हैं। स्थिति नियंत्रण में है। मलेरिया और वायरल फीवर प्रभावित गांवों में कैंप लगाए जा रहे हैं। अब तक किसी की मौत बुखार से मलेरिया से नहीं हुई है। गांवों में मच्छरनाशक स्प्रे के साथ डीडीटी के घोल का छिड़काव कराया जा रहा है। घर-घर अभियान चलाकर मच्छरों का लार्वा भी नष्ट किया जा रहा है। इसके लिए जिले में 35 टीमों को लगाया गया है।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ