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‘श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अभिमान को किया चूर’

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बिल्सी के बड़नौमी गांव में चल रही भागवत कथा सुनते लोग। संवाद - फोटो : BADAUN
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बिल्सी। गांव बड़नौमी स्थित ग्राम देवता मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कान्हा की बाल लीलाओं का बखान करते हुए बहजोई से पधारे कथावाचक सोमदत्त शर्मा ने कहा कि कृष्णजी, विष्णु जी के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्व पापहारी, पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के सभी अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण ही माने जाते हैं। नन्हे कृष्ण द्वारा जन्म के छठे दिन ही शकटासुर का वध कर दिया गया। सातवें दिन पूतना को मौत की नींद सुला दिया। तीन महीने के थे तो कान्हा ने व्योमासुर को मार गिराया। प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। इस मौके पर अमन सिंह, लोकेश मौर्य, राजेश मौर्य, विनोद गुप्ता, संजय, हरिभगत आदि मौजूद रहे।
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