बदायूं। सोमवार को महिलाओं ने वट सावित्री की विधि-विधान से पूजा की, साथ ही पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वटवृक्ष की पूजा की। वट सावित्री की पूजा के लिए सूर्योदय के साथ ही वटवृक्ष के नीचे सुहागिने जुटना शुरू हो गई थी। बरगद के तने को कच्चे सूत (धागा) से लपेट कर व्रत रखने वाली महिलाओं ने 7 या 21 बार परिक्रमा की।
आस्था है कि पति की लंबी आयु की कामना, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए वट सवित्री व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से अपने पति का जीवन वापस पाया था, तभी से वट वृक्ष का इस दिन से पूजन शुरू हुआ। पृथ्वी पर एक वट वृक्ष में तीनों देवों (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) की शक्तियां हैं। वट वृक्ष अपनी विशालता के लिए भी जाना जाता है। यह वृक्ष ज्येष्ठ माह की तपती धूप से लोगों को बचाता रहा है। इसीलिए ज्येष्ठ माह में इसकी पूजा की परंपरा बन गई। संवाद