बिल्सी। मोहल्ला संख्या आठ स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को पर्यूषण पर्व के समापन के बाद क्षमावाणी कार्यक्रम हुआ। इसमें जैन समाज के लोगों ने पिछले वर्ष में हुई भूलों और अनजाने में हुई भूल को स्वीकारते हुए क्षमा मांगी।
जैन अनुयायियों ने कहा कि क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है। क्षमावाणी हमें झुकने की प्रेरणा देती है। दस लक्षण पर्व हमें यही सीख देता है कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैर भाव-विरोध को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए और हम दूसरों को भी क्षमा कर सकें यही भाव मन में रखना चाहिए। यही क्षमावाणी है।
कविता के माध्यम से प्रशांत जैन ने कहा कि न किसी को गम का संसार दो। न किसी को छल कपट का उपहार दो। नर से महावीर बनना हो तो, हर एक को आत्मीयता का व्यवहार दो। हर एक को प्यार और अपनापन दो।
भला हुआ हो चाहे बुरा उसे भुला दीजिये। भीतर के जीवन पुष्प को खिला लीजिये। प्यार से पड़ी हो चाहे खार से पड़ी हो। जो गांठें पड़ी हैं उसे खोल लीजिये। भूल हो जाना मानव मात्र का स्वभाव है लेकिन क्षमा करना देवीय स्वभाव है।
अधिकतर बातें ऐसी होती हैं जिनका क्षमा कर देने से अंत हो जाता है। क्षमा देकर जख्मों को भूल जाना बेहतर है क्योंकि याद रखने लायक और बहुत कुछ है। हमारा अहंकार हमे क्षमा मांगने से रोकता है ओर तिरस्कार क्षमा देने में बाधक बनता है।
इस मौके पर मीडिया प्रभारी प्रीत जैन सोनी, प्रशांत जैन, बबिता जैन, मानसी जैन, मोना जैन, डॉ आरती जैन, स्वीटी जैन, इंदु जैन, मान्या जैन, दिव्या जैन, नीलम जैन, ज्योति जैन, शीला जैन, चुन्नी जैन, सोनल जैन मौजूद रही। संवाद