हत्यारोपी पत्नी वरफा देवी। संवाद
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बदायूं। मौजूदा परिवेश में संपत्ति, विवाहेतर संबंध की खातिर अपराध बढ़े हैं। जरीफनगर का रोहताश हत्याकांड भी इसी का उदाहरण है। यहां जब पत्नी बर्फा देवी को दूसरी महिला के पति के जीवन में आने से संपत्ति जाने का डर हुआ तो उसने उसकी हत्या का ताना-बुन डाला। यही नहीं जब सुपारी देने के लिए पैसे नहीं जुटा पाई तो जमीन ही हत्यारोपी के नाम कर दी। परिणाम यह रहा कि आज वह खुद जेल में है तो 15 साल की बेटी भी बाल सुधार गृह में पहुंच गई है।
पारिवारिक रिश्ते बिगड़ने की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी, इससे पहले दांदरा गांव निवासी रोहताश की जिंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा था। वह खेतीबाड़ी करता था। भरापूरा परिवार था, दो बच्चों और पत्नी के साथ जीवन की गाड़ी सही प्रकार चल रही थी। बावजूद इसके रोहताश का एक रिश्तेदार महिला के प्रति आकर्षण बढ़ता चला गया। बात यहां तक पहुंच गई कि वह उस महिला को लेकर दिल्ली चला गया। करीब पंद्रह दिन तक घर वाले उन्हें खोजते रहे। काफी बाद में घरवालों को समूचे मसले का पता चल सका। उनके काफी कहने सुनने के बाद रोहताश उस महिला को उसकी ससुराल छोड़ आया लेकिन उसने उससे मिलना जुलना बंद नहीं किया। इससे परिवार में कलह बढ़ती गई।
आखिरकार रोहताश ने घर में खाना पीना तक बंद कर दिया। दूसरी ओर उसकी पत्नी बर्फा देवी ने सोचा कि अगर रोहताश उस महिला को घर ले आया तो सारी जमीन जायदाद उसके नाम कर देगा। वह और उसके बच्चे सड़क पर आ जाएंगे। ऐसे में उसने रोहताश को हटाने का ताना-बाना बुन डाला। उसने संभल जिले के अपराधी बालिस्टर को रोहताश की तीन लाख रुपये में सुपारी दे दी। फिर चार सितंबर की रात पति का कत्ल करा दिया।
बेटी भी बन गई कातिलों की मददगार
रोहताश की बेटी भी उसके कातिलों की मददगार बन गई। उसकी मां उसे जो समझाती रही बेटी वही मानती रही। इस हत्याकांड की शुरुआत से लेकर अंत तक बेटी ने मां का साथ दिया। उसने एक बार भी पिता की ओर ध्यान नहीं दिया। हत्या के दौरान मां ने जो कहानी समझाई, उसने पुलिस को वही बताया।