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Budaun News: आशा ने जिस नवजात को मृत बताकर किया था गायब... वह 49 घंटे बाद जिंदा मिला

Sun, 21 Jul 2024 08:08 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

बदायूं में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक आशा कार्यकर्ता ने नवजात बच्चे को मृत बताकर गायब कर दिया। नवजात की तलाश में उसका पिता 49 घंटे तक भटका। जब उसने आशा कार्यकर्ता पर दबाव बनाया तो तब पूरा मामला खुला।  
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मां की गोद में नवजात - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं में प्रसव के बाद बृहस्पतिवार को रात 12 बजे आशा ने जिस नवजात को मृत बताकर लापता किया था, वह रविवार को करीब 49 घंटे बाद जीवित मिला। नवजात को निजी अस्पताल प्रशासन ने माता-पिता को सौंप दिया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई है। अहम सवाल यही है कि कि जीवित बच्चे को आशा ने उसके माता पिता से मृत क्यों बताया था। निजी अस्पताल में नवजात को भर्ती कराते वक्त उसकी मां का नाम बदल दिया था।

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मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव पातरचोहा निवासी अफसाना (35) पत्नी रियासत अली को बृहस्पतिवार को प्रसव पीड़ा हुई। परिवार वाले उसे आशा कार्यकर्ता के साथ देर रात जिला महिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन आशा मुन्नी ने उसे महिला अस्पताल में भर्ती नहीं कराया, बल्कि शहर के एक निजी अस्पताल में ले गई। वहां अफसाना ने रात करीब 12 बजे बेटे जन्म दिया। उसकी हालत ठीक नहीं थी। आशा कार्यकर्ता ने कहा कि इसे महिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराएंगी लेकिन आशा उस नवजात को निजी अस्पताल अम्रतधारा में ले गई लेकिन रात में ही महिला के साथ आए उसके पति को बता दिया कि बेटा मृत पैदा हुआ था। यही बात रियासत ने अपनी पत्नी को बताई। 

नवजात की तलाश में भटकता रहा पिता 
शुक्रवार को सुबह 10 बजे अफसाना और रियासत दोनों घर चले गए। घरवालों ने कहा कि जब बच्चा मृत पैदा हुआ था तो उसे लेकर क्यों नहीं आए। रियासत इस पर शुक्रवार को ही लौटकर निजी अस्पताल में आया, जहां उसकी पत्नी की डिलीवरी हुई थी। निजी अस्पताल ने बताया कि आशा उसके बच्चे को यह ले गई कि महिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराएगी। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में रियासत से इनकार किया गया तो फिर वह शनिवार को भटकता रहा लेकिन गांव में जाकर उसने आशा पर दबाव बनाया तो आशा ने पूरा मामला खोला। 

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पता लगा कि निजी अस्पताल में उसका बच्चा जीवित है। अमृतधारा अस्पताल के डॉ. वाईआर खान ने बताया कि मुन्नी व गायत्री नाम दर्ज कराने वाली दो महिलाएं यह कहकर नवजात को लाई थीं कि वो उसकी बुआ हैं। उन्होंने ही नवजात की मां का नाम रूबी बताया था। इसलिए नवजात की भर्ती फाइल बेबी ऑफ रूबी के नाम से बनाई गई थी। हालांकि जब पूरा मामला खुला तो मुन्नी, गायत्री तथा नवजात के माता पिता को बुलाया गया। इनके हवाले बच्चे को किया गया है। इसकी वीडियोग्राफी कराई गई है। पूरा मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा है।

गलत नाम से भर्ती था नवजात
पूरे मामले में खास बात यह है कि जहां नवजात की मां का नाम अफसाना निजी अस्पताल में दर्ज था। वहीं अमृतधारा अस्पताल में उसे बेबी ऑफ रूबी नाम से भर्ती कराया गया था। 
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