महादेव को समर्पित सावन मास में इस बार पांच सोमवार होंगे। अन्य कई सुयोग इसकी महत्ता बढ़ा रहे हैं। इस बार सावन की शुरुआत प्रीति योग से हो रही है और विश्राम शोभन योग में होगा। यानी इस बार पूरे सावन भर भक्तों पर भगवान पंचानन की कृपा खूब बरसेगी।
बरेली के ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास की अवधि में सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव ही संभालते हैं। देवी सती ने दूसरे जन्म में भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा से निराहार रहकर सावन में घोर तप किया था। इसलिए इस महीने का विशेष महत्व है।
इस बार सावन 22 जुलाई सोमवार से प्रारंभ होकर 19 अगस्त सोमवार रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में पूरे महीने व्रत रखा जाता है। सावन में मंगलवार के दिन मंगला गौरी के भी व्रत रखे जाते हैं। यानी सावनभर भक्तों को शिव और शक्ति की कृपा प्राप्त होती है।
22 जुलाई पहला सोमवार
इस दिन अत्यंत कल्याणकारी श्रवण नक्षत्र और प्रीति योग व्याप्त रहेगा। इसके स्वामी चंद्रमा है। विवाह के इच्छुक जातकों के लिए यह सोमवार बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगा।
29 जुलाई दूसरा सोमवार
दूसरा सोमवार भरणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। इसमें जलाभिषेक करने से व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती हैं। बीमारी, धनाभाव और व्यापार की अड़चने भी दूर हो जाती हैं।
पांच अगस्त को तीसरा सोमवार
तीसरा सोमवार अश्लेषा नक्षत्र में होगा। कर्ज, पारिवारिक कलह, असफलता से परेशान लोगों के लिए यह दिन काफी महत्वपूर्ण है। शिवार्चन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
12 अगस्त चौथा सोमवार
यह सोमवार स्वाति नक्षत्र में होगा। इस दिन शिव का जलाभिषेक करने से चौतरफा सफलता मिलेगी। विद्या प्राप्ति या अपनी विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए यह दिन विशेष रहेगा।
19 अगस्त पांचवां सोमवार
इस दिन श्रवण नक्षत्र और शोभन योग व्याप्त रहेगा। यह समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और सिद्धियों को प्रदान करने वाला होगा। रक्षाबंधन के साथ सावन का विश्राम होगा।