कोरोना संक्रमण की पहली के बाद दूसरी और तीसरी लहर भी गुजर गई। पहली लहर के दौरान कोरोना के स्वरूप, लक्षण और इलाज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत के दौरान जिले में करीब 100 लोगों की जान भी चली गई, लेकिन तीसरी लहर आते-आते संसाधनों में कई गुना इजाफा हुआ। बेड, ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है। बड़ी आबादी का टीकाकरण भी हो चुका है। ऐसे में तीसरी लहर का असर नहीं दिखा।
दूसरी लहर के दौरान संक्रमितों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे थे। ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी। अब जिले में पांच ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनमें दो प्लांट राजकीय मेडिकल कॉलेज, एक जिला अस्पताल, एक सीएचसी घटपुरी और एक सीएचसी रुदायन में है। राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के प्लांटों की क्षमता एक-एक हजार लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 100 वेंटीलेटर भी हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 150 बेड, रुदायन और घटपुरी सीएचसी पर सौ-सौ बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के पास 100 ऑक्सीजन कांसन्ट्रेट भी हैं। प्रशिक्षित स्टाफ होने के साथ टीकाकरण भी तेज गति से हो रही है। पहली लहर के दौरान कोरोना से निपटने के संसाधन शून्य थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जिले में अब संसाधनों की कोई कमी नहीं है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीके को सुरक्षा कवच भी दिया जा रहा है। इतना ही नहीं समय-समय पर अस्पतालों में पूर्वाभ्यास भी किया जा रहा है।
हमने कोरोना को हराया, स्वस्थ हुए
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मैं संक्रमित हुआ था। उन दिनों कोरोना संक्रमण को लेकर जिस तरह की मीडिया में रिपोर्ट चल रही थीं उसको सोचकर आज भी डर लगता है। अब पूरी तरह स्वस्थ हूं।
-गगन बत्रा
पहली लहर से ज्यादा कहर दूसरी लहर ने बरपाया था। पहली लहर के दौरान लॉकडाउन रहा तो संक्रमण ज्यादा नहीं फैला। दूसरी लहर में मैं भी संक्रमण का शिकार हो गया। अब मैं स्वस्थ हूं।
-राजीव रस्तोगी
जब कोरोना संक्रमित होने की रिपोर्ट आई तो पूरा परिवार घबरा गया था। अस्पतालों में बेड नहीं थे। ऑक्सीजन की किल्लत थी। मैं भी संक्रमित हुआ था। ईश्वर न करें कि अब ऐसा हो।
-सुनील माहेश्वरी
कोरोना संक्रमण ने लोगों के जीवन में काफी कुछ बदल दिया। दूसरी लहर में लॉकडाउन नहीं था। इसका नतीजा सब लोग देख ही चुके हैं। जब मैं संक्रमित हुआ तब कुछ समझ नहीं आ रहा था।
-मनीष
पहली लहर से ही स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा दबाव था। उस समय वायरस के बारे में कुछ पता नहीं था। इस बीच लोगों की जांच करना किसी चुनौती से कम नहीं था। पहली और दूसरी लहर में कई स्वास्थ्य कर्मी संक्रमण का शिकार हुए। दूसरी लहर में मैं भी संक्रमण की चपेट में आया। कई दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
-शिवम रस्तोगी, फार्मासिस्ट जिला अस्पताल
वह बहुत मुश्किल दौर था। पहली लहर के दौरान ही मेरी ड्यूटी कोविड सैंपल लेने में लगा दी गई थी। टीम के साथ दिन-रात सैंपलिंग कर रहा था। संसाधनों का भारी अभाव था। पहली लहर के दौरान ही संक्रमण का शिकार हो गया। कई अन्य साथी भी संक्रमण का शिकार हुए, लेकिन स्वस्थ होने के बाद फिर से काम पर लौट आए।
-शाहरोज खान, लैब टेक्नीशियन जिला अस्पताल
हमने भी लगवाया टीका
12 से 14 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ था उस दिन काफी खुशी हुई। स्कूल में टीकाकरण शिविर लगा तो मैंने भी सहपाठियों के साथ टीका लगवाया। टीके के बाद अच्छा महसूस हुआ।
-कार्तिक, छात्र
अब तक बच्चे भी समझ रहे हैं कि कोरोना से बचाव का कवच टीका ही है। बच्चे भी बढ़-चढ़कर टीका लगवा रहे हैं। मैंने भी टीका लगवाया। इसके बाद बेहतर महसूस कर रहा हूं।
-फतेह जुनेजा, छात्र
- पहली लहर के दौरान को कोरोना वायरस के बारे में कुछ मालूम ही नहीं था। वह सबसे चुनौतीपूर्ण समय था। बिना संसाधनों के कोरोना से लड़ना खतरे से कम नहीं था। दूसरी लहर तक संसाधनों में इजाफा जरूर हुआ, लेकिन काफी जरूरतें पूरी नहीं हो सकी थीं। अब जिले में पर्याप्त संसाधन हैं, पांच ऑक्सीजन प्लांट, 200 से ज्यादा बेड के साथ प्रशिक्षित स्टाफ है।
-डॉ. अनिल शर्मा, एसीएमओ/नोडल अधिकारी, संक्रमण रोग विभाग
मनीष।- फोटो : BADAUN
शिवम रस्तोगी।- फोटो : BADAUN
शाहरोज खान।- फोटो : BADAUN
कार्तिक।- फोटो : BADAUN
रमन बत्रा।- फोटो : BADAUN
राजीव रस्तोगी।- फोटो : BADAUN
सुनील माहेश्वरी।- फोटो : BADAUN