बाल नहीं हटाते तो नहीं खुलती पोल
ससुराल में पूजा की मौत के बाद शव सीधे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। इसलिए मायके के काफी लोग पूजा का चेहरा नहीं देख पाए थे। पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाने की जल्दी थी, इसलिए सभी लोगों से कह दिया गया था कि घर पहुंचकर चेहरा देख लें।
यही वजह है कि घर पहुंचते ही चेहरा खोला गया। राजकुमार के अनुसार अगर बहन के चेहरे से बाल नहीं हटाए जाते तो शायद आंखों के गायब होने की बात सामने नहीं आती। अंतिम संस्कार हो जाता और डॉक्टरों की करतूत बालों के पीछे ही छिपी रह जाती।
जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषी बताया
शव से आंखें निकालने के मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने जांच रिपोर्ट शनिवार देर शाम डीएम को सौंप दी। सूत्र बताते हैं कि इसमें कर्मचारियों ने डॉक्टरों के सिर पर ही ठीकरा फोड़ा है।
बोर्ड के सदस्यों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान एक कर्मचारी ने बताया कि महिला की आंखें गायब होने के संबंध में डॉक्टरों और फार्मासिस्ट को भलीभांति जानकारी थी।
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एक डॉक्टर ने महिला के शव का फोटो लेकर फार्मासिस्ट को व्हाट्सएप भी किया था। इस दौरान फार्मासिस्ट ने मामला दबाने को कहा था। ऐसे में न परिवार वालों को कुछ बताया गया और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया। वहीं दूसरी ओर इस मामले की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी ने अब तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।