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अंडरग्राउंड विद्युत लाइन की चपेट में आकर करंट लगने से दरोगा के दिव्यांग बेटे की मौत

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अंडरग्राउंड बिजली लाइन के केबल बॉक्स में फंसी ट्राइसिकिल।संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। शहर में बिना मानक के बिछाई गई अंडरग्राउंड बिजली लाइन जानलेवा हो गई है। बरसात शुरू होते ही शहर में एक गणित प्रवक्ता जान चली गई थी। सोमवार रात मुरादाबाद में तैनात दरोगा राजपाल सिंह के दिव्यांग बेटे रवित कुमार की अंडरग्राउंड केबल के खुले बॉक्स की चपेट में आने से करंट लगने के कारण मौत हो गई। परिवार वाले रात भर उसका इंतजार करते रहे। सुबह लोगों ने उसका शव और ट्राइसिकिल केबल बॉक्स से चिपकी देखी तो पुलिस को जानकारी दी। मंगलवार दोपहर युवक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। अभी परिवार वालों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
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सिविल लाइंस के मोहल्ला नेकपुर गली नंबर दो निवासी राजपाल सिंह मुरादाबाद जिले के कांठ थाने में दरोगा हैं। तीन बेटों में उनका मंझला बेटा रवित कुमार (25) दिव्यांग था। वह टीवी-फ्रिज आदि का अच्छा मिस्त्री भी था। सोमवार रात खाना खाने के बाद रवित मां से यह कहकर घर से निकला था कि वह बाबा कॉलोनी में अपने दोस्त की इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप पर जा रहा है। रवित ट्राइसिकिल लेकर निकला तो देर रात तक घर नहीं लौटा। परिवारवालों ने उसे तलाशा पर उसका कुछ पता नहीं चला। सुबह परिवारवाले उसे फिर तलाश करने निकल पड़े। तब पता चला कि मंडी पुलिस चौकी को उसका शव कुछ दूर स्थित स्कूल के पास पड़ा मिला था। उसकी बिजली के खुले केबल बॉक्स के करंट की चपेट में आने से मौत हुई थी।
घटनास्थल की स्थिति से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि रमित देर रात बाबा कॉलोनी से लौट रहा होगा। तभी स्कूल के पास ढलान पर उसकी ट्राइसिकिल पलट गई। वहीं पर केबल बॉक्स खुला पड़ा था। ट्राइसिकिल का हैंडल उस बॉक्स में लगा तो रवित को तेज करंट लगा और वहीं उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के साथ ही रवित के दरोगा पिता राजपाल सिंह को सूचना दी। वह मुरादाबाद से बदायूं पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव को ले गए। बाद में युवक की अंत्येष्टि कर दी गई।
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सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एक युवक की करंट से मौत का मामला जानकारी में आया है। फिलहाल पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिवार को सौंप दिया है। अभी इस मामले में कोई तहरीर नहीं आई है।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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अंडरग्राउंड लाइन : एक महीने में दूसरी मौत, बेजुबानों की गिनती नहीं
बदायूं। शहर में बिजली चोरी और लाइन लॉस के लिए डाली गई अंडरग्राउंड केबल ने एक महीने में दूसरी जान ले ली। इससे पहले 16 जुलाई को गणित प्रवक्ता की मौत के बाद केबल की खराब गुणवत्ता का मुद्दा गरमाया था। इसके बाद कई बेजुबानों (पशुओं) की जान भी गई। अब बाबा कॉलोनी में मझिया रोड पर अंडरग्राउंड केबल बॉक्स की चपेट में आकर दिव्यांग रवित की मौत के बाद फिर से केबल की खराब गुणवत्ता और खुले हुए केबल बॉक्स सुर्खियों में है।
अंडरग्राउंड केबल प्रोजेक्ट पर 119 करोड़ जरूर खर्च किए गए, लेकिन इनकी गुणवत्ता शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। शासन स्तर से विजीलेंस जांच में भी खामियां मिलीं। इसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। गणित प्रवक्ता की अंडरग्राउंड केबल बॉक्स से निकले तार की चपेट में आकर करंट लगने से मौत के बाद कार्यदायी संस्था राज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने खुले पड़े केबल बॉक्सों को बंद कराने के लिए अभियान भी चलाया, लेकिन इसके बाद भी शहर में खुले पड़े केबल बॉक्स लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। इसी क्रम में सोमवार रात दिव्यांग रवित कुमार अंडरग्राउंड केबल की भेंट चढ़ गया।
दिव्यांग रवित की ट्राइसिकिल ढलान से फिसलने के बाद केबल बॉक्स से टकरा गई और उसकी जान चली गई। परिवारवाले रात भर उसका इंतजार करते रहे। सुबह उनको रवित की मौत की सूचना मिली। परिवारवालों की ओर से पुलिस को अब तक कोई तहरीर नहीं दी है।
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रात भर केबल बॉक्स और ट्राइसिकिल के बीच फंसा रहा शव
बदायूं। रवित का शव रात भर केबल बॉक्स और उसकी ट्राइसिकिल के बीच फंसा रहा। सुबह लोगों ने देखा तो इसकी सूचना सिविल लाइंस पुलिस को दी। सूचना पर सिविल लाइंस पुलिस और कार्यदायी संस्था राज कॉरपोरेशन के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तब शव निकाला जा सका। शिनाख्त के बाद परिवार वालों को सूचना दी गई। रवित चार भाई बहनों में दूसरे नंबर का था। सूचना मिलने के बाद उसके पिता सब इंस्पेक्टर राजपाल भी पहुंच गए। रवित का एक भाई रोहित सिंह जम्मू-कश्मीर में रह कर नौकरी करता है। बहन प्रियंका की शादी हो चुकी है। छोटा भाई रजनीश घर पर परिवार के साथ रहता है।
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तकनीकी टीम करेगी जांच
हादसे को लेकर पावर कॉरपोरेशन ने प्रथम दृष्टया जांच में पाया है कि केबल बॉक्स के पैनल में ट्राइसिकिल की टक्कर के कारण हादसा हुआ है। हादसा सोमवार देर रात हुआ। आसपास के इलाके में स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही कुछ दिन पहले ही यहां सड़क निर्माण हुआ है। ऐसे में केबल बॉक्स के पैनल की ऊंचाई सड़क से काफी कम हो गई है। एक्सईएन विद्युत वितरण खंड प्रथम प्रवेश कुमार ने मामले में तकनीकी जांच एसडीओ पनबड़िया नीरज गोवाड़ी को सौंपी है। कहा-हादसे का सही कारण तकनीकी जांच के बाद ही पता लग सकेगा।
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हादसे में करंट लगने से दिव्यांग युवक की जान गई है। हादसा केबल बॉक्स के पैनल में ट्राइसिकिल की टक्कर से हुआ है। इसकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। जिस स्थान पर हादसा हुआ है वहां सड़क निर्माण के कारण केबल बॉक्स की ऊंचाई भी कम हो गई है। जांच के बाद ही इस बारे में ज्यादा कुछ कहा जा सकता है।
-प्रवेश कुमार, एक्सईएन विद्युत वितरण खंड प्रथम
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जहां भी केबल बॉक्स खुला होने की सूचना मिल रही है अभियान चलाकर उनको बंद कराया जा रहा है। जिस स्थान पर हादसा हुआ है वहां कुछ दिन पहले ही केबल बॉक्स बंद कराया गया था। किसी ने केबल बॉक्स से छेड़छाड़ कर ढक्कन हटा दिया होगा। टक्कर के कारण ट्राइसिकिल केबल बॉक्स में फंस गई।
-देवेंद्र सिंह, सीनियर मैनेजर आरसीएल
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सिर्फ अंडरग्राउंड केबल ही नहीं पावर कॉरपोरेशन के मीटरों में भी गड़बड़ी है। अनाप-शनाप बिल भेजे जाते हैं। बाद में बिल ठीक कराने के नाम पर वसूली की जाती है।
- पीके सक्सेना, व्यापारी
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अंडरग्राउंड बिजली लाइन के बाद लगा था कि बिजली को लेकर समस्याएं कम होंगी, लेकिन समस्याओं में और इजाफा हो गया है। अब तो लोगों की जान तक जा रही है।
-गुलाब सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी
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अंडरग्राउंड केबल से यह पहला हादसा नहीं है। कुछ दिन पहले ही एक गणित प्रवक्ता की भी मौत हो गई थी। बेजुबान पशुओं की तो कोई गिनती नहीं है। इसका जिम्मेदार कौन है।
-संजीव शर्मा, समाजसेवी
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कार्यदायी संस्था ही नहीं पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है। जब केबल डाली जा रही थी तब उसकी गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं हुई।
- धर्मेंद्र कुमार, शिक्षित युवा
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मंत्री की बात
अंडरग्राउंड केबल मामले में मैंने लखनऊ जाकर प्रबंध निदेशक एम देवराज से शिकायत की थी। उसके आधार पर जांच शुरू हो गई है। भ्रष्टाचार का मामला निकला तो हर दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। कंपनी से लेकर विभाग तक दोषी तलाशने का काम शासन स्तर से किया जा रहा है।
- महेश चंद्र गुप्ता, राज्यमंत्री नगर विकास मंत्रालय
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विधायक आबिद ने कहा था: बारूद के ढेर पर है शहर
अंडरग्राउंड केबल का जिन्न 2016 में उस वक्त बोतल से बाहर आया था जब तत्कालीन सपा विधायक आबिद रजा और तत्कालीन सपा सांद धर्मेंद्र यादव में ठन गई थी। आबिद ने उसी समय अंडरग्राउंड लाइन को घोटाले की लाइन बताया था। कहा था कि शहर बारूद के ढेर पर है और जिम्मेदार बेफिक्र हैं। उस समय आबिद से सपा ने किनारा कर लिया। बाद में सांसद धर्मेंद्र भी चुनाव हार गए। आबिद रजा एक बार आजम खां के प्रयास से दोबारा सपा में आए भी पर दोनों नेताओं के दिल नहीं मिल सके।

रवित कुमार फाइल फोटो। संवाद- फोटो : BADAUN

 

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