अमर उजाला ब्यूरो
वजीरगंज।
वजीरगंज की सपा ब्लॉक प्रमुख सुमिता वार्ष्णेय के सामने कुर्सी बचाए रखने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रमुख के विरोध में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लामबंद हुए विरोधी खेमे ने अपने समर्थन में सदस्यों के बहुमत में होने का दावा करते हुए सभी के अपने पक्ष में शपथ पत्र भी दाखिल करा दिए हैं। जिनकी मंगलवार को ब्लॉक मुख्यालय पर बीडीओ द्वारा जांच की गई।
सपा सरकार में हुए ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सुमिता वार्ष्णेय अपने एक मात्र विरोधी को बहुमत से परास्त कर ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज हुईं थीं। उनकी इस जीत में तत्कालीन सत्ताधारी विधायक की अहम भूमिका रही थी, जिसके चलते सुमिता वार्ष्णेय ने आसानी से कुर्सी हथिया ली थी। चुनाव में शिकस्त खाने के बाद विरोधी खेमे को एक अवसर की तलाश थी, जो उसे सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद मिल गया। सत्ता बदलते ही विरोधी पक्ष गुपचुप रूप से अपनी योजना को अंजाम देने में जुट गया। बताते हैं धीरे-धीरे विरोधी खेमे ने क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपनी ओर करना शुरू कर दिया। उधर विरोधी खेमे की सक्रियता की सुगबुगाहट होने पर ब्लाक प्रमुख गुट भी सक्रिय दिखाई देने लगा है। दोनों ही गुट अपनी अपनी गोटें बिठाने में लगे हुए हैं। चर्चा है कि सदस्यों को अपने अपने गुट में करने के लिए उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं।
उधर प्रमुख के विरोधी पक्ष के धीरेंद्र यादव ने 58 सदस्यों के शपथ पत्र प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 19 अगस्त को डीएम को दिए थे जिनकी जांच डीएम ने बीडीओ ब्रज मोहन को सौंपी है। मंगलवार को बीडीओ शपथ पत्रों की जांच कर उन्हें सत्यापित कर डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। अगर जांच में शपथ पत्र सही पाए गए और उनका जरूरी संख्याबल पूरा हुआ तभी डीएम अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि देंगे।
उधर बीडीओ ब्रजमोहन ने मंगलवार को शपथ पत्रों का सत्यापन किया। 58 में से 42 सदस्य आए। बीडीओ ने बताया कि इसकी आख्या डीएम को दी जाएगी। उसके बाद अगली कार्रवाई डीएम के आदेश से की जाएगी।