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भाजपा-कांग्रेस के हिंदू-मुस्लिम कार्ड से सपा-बसपा की उड़ी नींद

Tue, 16 Jul 2013 01:29 AM IST
फैजाबाद/ब्यूरो
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उत्तर प्रदेश में विहिप और उसके सहोदर संगठनों की रामनगरी से सटे इलाकों में सक्रियता और उसकी प्रतिक्रिया में मुस्लिम संगठनों की सरगर्मी से बसपा-सपा सरीखे दलों की नींद उड़ गई है।
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लखनऊ में रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती की चिंता यूं ही नहीं सामने आई, बल्कि यहां से कार्यकर्ताओं के फीडबैक मुस्लिम समेत हिंदू वोटों की लामबंदी का संदेश दे रहे हैं। सपा में भी यही चिंता है।

विधानसभा चुनाव में पार्टी की खास ताकत बने मुस्लिम वोट बैंक में कांग्रेस सेंधमारी कर रही है। सपा का साथ देने वाले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग समेत कई संगठन अब खुलकर कांग्रेसपरस्ती की बात कर रहे हैं।
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यह असर 6 जुलाई में यहां आए भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह द्वारा राममंदिर व हिंदुत्व मुद्दा गरमाने के चौथे दिन कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री के मुस्लिम कार्ड खेलने की रणनीति का हिस्सा है।

सपा-बसपा इन दोनों को गुजराती कहकर बाहरी होने की चुटकी ले रही थी, मगर अब हिंदू व मुस्लिम, दोनों वोट बैंक खिसकने की आशंका से अंदर तक हिली हुई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने फैजाबाद और आसपास के जिलों में कांग्रेस-भाजपा की इसी राजनीति पर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील करके बौखलाहट भी सामने ला दी है।

विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की ओर से 25 अगस्त से शुरू हो रही 20 दिनी 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में हिंदू वोट बैंक लामबंद करने की कवायद से सपा में भी बेचैनी है। विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल के हाथ में यात्रा का रिमोट है, वे संतों की गुटबाजी तोड़ एकता लाने की मुहिम में एक माह के भीतर 12 दिन अयोध्या में गुजार चुके हैं।

उन्हें सुलह-समझौते से मंदिर-मस्जिद बनाने की मुहिम चला रहे हाईकोर्ट इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पलोक बसु के पाले से कई संत-महंत तोड़ने में सफलता भी मिली। अब धर्म प्रसार सभा, बजरंग दल और संतों के जरिए फैजाबाद, अंबेडकरनगर, गोंडा, बहराइच, बस्ती व बाराबंकी सीमा के परिक्रमा मार्ग से सटे तीन सौ से अधिक गांवों में डेलीगेटों की टीम तक बन गई है।

विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि यह सक्रियता भाजपा के नाम पर नहीं, बल्कि हिंदुत्व व मंदिर मुद्दे पर है। मगर सपा-बसपा के लोग इसे अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा में लाने की कड़ी से जोड़ रहे हैं।

उधर, मुस्लिम वोट बैंक में मोदी हराओ अभियान के तहत लोकसभा चुनाव में सपा का दामन छोड़ कांग्रेस को तरजीह देने की आहट है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नजमुल हसन गनी कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव समझौते के लिए कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार आम मुसलमानों में मोदी के विरोध में कांग्रेस ही विकल्प दिख रही है।

अधिवक्ता इसरार अहमद भी इसी बात के समर्थक हैं। कहते हैं कि सपा को यूपी की सत्ता तक ही रहने देना हित में है। वोट बंटा तो भाजपा देश में काबिज हो जाएगी। इस तर्क को यहां तमाम प्रबुद्ध मुस्लिम लोग भी दोहराते हैं।

सपा के एक मंत्री व दिग्गज नेता कहते हैं कि मुख्यमंत्री व नेताजी के स्तर से यह तय हो चुका है कि 90 के दशक जैसी बयानबाजी करके खतरा मोल नहीं लेना है। 84 कोसी परिक्रमा पर नजर रखी जा रही है, जैसे ही फ्लाप शो साबित होगा, सपा की चिंता अपने आप कम हो जाएगी।
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