उत्तर प्रदेश में आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार खालिद मुजाहिद की हिरासत में हुई मौत का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
राज्य सरकार की सिफारिश के दो माह पूरे होने को हैं लेकिन सीबीआई ने अभी तक इस मामले की जांच अपने हाथ में नहीं ली है।
18 मई 2013 को पेशी से लाए जाने के दौरान खालिद की मौत हो गई थी। उसके परिवार वालों की मांग पर राज्य सरकार ने 19 मई को मौत के मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी, लेकिन दो माह बीतने पर भी सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में नहीं ली।
वहीं बाराबंकी पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर रखी थी।
23 नवंबर 2007 को लखनऊ, फैजाबाद व वाराणसी कचहरी में हुए सीरियल ब्लास्ट के आरोपी खालिद मुजाहिद को 18 मई को अन्य आरोपियों के साथ पेशी पर फैजाबाद कोर्ट ले जाया गया था।
वहां से लखनऊ लौटते समय बाराबंकी के रामसनेही घाट के पास तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई थी।
बाराबंकी में चिकित्सकों ने पैनल से खालिद के शव का पोस्टमार्टम किया था जिसमें विसरा के साथ शरीर के कुछ अन्य अवयव जांच के लिए लखनऊ स्थित फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला भेजे गए थे।
प्रयोगशाला ने पिछले दिनों जांच पूरी कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी थी। इसमें भी मौत के कारणों के बारे में कोई तथ्य सामने नहीं आया था। प्रयोगशाला ने केवल इतना कहा था कि मौत जहर से नहीं हुई है।
राज्य सरकार ने पिछले दिनों कई मुकदमे वापस लेने की कवायद शुरू की थी। उसने कई मामलों को चिह्नित किया था, जिनमें खालिद व तारिक का मुकदमा भी शामिल था, लेकिन किसी भी तरह की जांच न होने से सरकार के लिए कभी महत्वपूर्ण रहे इस मामले का अब कोई पुरसाहाल नहीं है।
वहीं, आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता का कहना है कि इस मामले की जांच अभी बंद नहीं हुई है। ऊपर से स्पष्ट निर्देश आने के बाद उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।