कैंसर का अभिशाप झेल रहे छोइया नदी के किनारे बसे गांव
बिजनौर। गंगा किनारे बसे जिले का भूजल स्वच्छ और साफ समझा जाता है, लेकिन इसी जनपद में प्रदूषित हो चुकी छोइया नदी अब कैंसर का श्राप दे रही है। छोइया के किनारे बसे दर्जनभर गांव में कैंसर पिछले एक दशक से पैर पसार रहा है। बीते एक दशक में पचास से अधिक लोग कैंसर की वजह से जान गंवा चुके हैं।
छोइया, गंगा की सहायक नदी है। साल 2000 के बाद छोइया की सूरत बदलनी शुरू हो गई। फैक्टरी का केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से अब छोइया में काली पानी बहते हुए दिखाई देता है। शुरूआत में आसपास के गांव वालों को दिक्कत नहीं हुई। बाद में प्रदूषित हो चुकी छोइया का असर दिखाई देने लगा। नदी के किनारे लगे नलकूप मटमैला पानी फेंक रहे हैं। इसके अलावा गांव में भूजल का स्वरूप भी बिगड़ा है। गांव के हैंडपंपों के पानी का स्वाद बिगड़ा और बीमारी होने लगी तो लोगों को हकीकत समझ में आई। मुद्दे की बात करें तो छोइया के किनारे बसे दर्जनभर गांव में कैंसर से पचास से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इन गांव में कैंसर का प्रकोप
नवादा, हादरपुर, छोइया नंगली, छोइया जलालपुर, छाछरी, शाहपुर लाल, सिंकदरी, अगरी, अगरा, मोमिनपुर दर्गो, गड़ाना, सुंदरपुर पूरी तरह से प्रभावित हैं। इन गांव में कैंसर का प्रकोप है। हर साल एक या दो लोगों को कैंसर अपनी चपेट में ले लेता है।
प्रयागराज कुंभ के दौरान नहीं छोड़ा गया था पानी
प्रयागराज में कुंभ के वक्त छोइया नदी में एक बूंद भी पानी नहीं था। शायद शासन और सरकार के सख्त रवैये के कारण ही छोइया नदी में पानी नहीं छोड़ा गया था। बीच-बीच में छोइया नदी में अवरोध पैदा कर पानी रोका गया था, जिससे छोइया का पानी गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाए।
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खानपान का रखें ध्यान तो कम रहती है कैंसर की संभावना
बिजनौर। कैंसर आज भी ऐसी बीमारी है जो किसी की भी रूह कंपा देती है। पहले इसके कम मरीज देखने को मिलते थे लेकिन अब इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। जिले में भी कैंसर के काफी मरीज हैं।
कैंसर के भी कई प्रकार होते हैं। कैंसर का पता आमतौर पर काफी बाद में ही चलता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग तो छोड़ो निजी चिकित्सक भी कैंसर का इलाज नहीं करते हैं। इसके मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। इसमें पैसा और वक्त दोनों का भारी नुकसान होता है। जिले में मेडिकल कॉलेज बनने पर शायद इसके रोगियों को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि बीमारी का इलाज कराने से बेहतर है कि बीमारी होने की संभावनाओं को ही कम कर दिया जाए। हालांकि कैंसर कोशिकाओं के असामान्य रूप से विकसित होने से होता है लेकिन कई मामलों में तो बहुत अधिक तंबाकू खाने, शराब पीने और धूम्रपान से भी कैंसर हो जाता है। कम से कम इनका सेवन तो बंद किया ही जा सकता है। यह करने के लिए तो चिकित्सक के पास जाने की भी जरूरत नहीं है, खुद की इच्छाशक्ति ही बहुत होती है।
ऐसे करें बचाव
धूम्रपान, तंबाकू, गुटका, शराब आदि का सेवन न करें।
हरी सब्जी, फल और दालें खाएं।
कीटनाशक युक्त सब्जी व फल धोकर खाएं।
बार बार गर्म होने वाला, अधिक तला, भुना और ज्यादा नमक में संरक्षित भोजन न खाएं।
वजन न बढ़ने दें और नियमित व्यायाम करें।