दहशत में ग्रामीणों ने जाग कर बिताई रात
धामपुर। तटबंध टूटने के बाद गांव मुबारकपुर गांवड़ी के ग्रामवासियों ने शनिवार रात जागकर बिताई। हालांकि सिंचाई विभाग और पीएनसी के अधिकारियों ने देर रात तक काम कर टूटे तटबंध को मिट्टी से भरे कट्टों और पत्थरों की पिचिंग लगा कर मरम्मत करा दी थी लेकिन ग्रामीणों को फिक्र लगी रही कि कहीं रामगंगा का जलस्तर फिर से न बढ़ जाए और तटबंध फिर से क्षतिग्रस्त न हो जाए। उधर रविवार को नदी का पानी भी 15 हजार क्यूसेक से घटकर सात हजार क्यूसेक रह गया।
मुबारकपुर गांवड़ी के पास से रामगंगा नदी का शनिवार सवेरे तटबंध क्षतिग्रस्त होने पर अधिकांश ग्रामीण टूटे बंधे को ठीक करने को फावड़े लेकर मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी। कुछ ही देर के बाद अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्र, एसडीएम धीरेंद्र सिंह, तहसीलदार रमेश चंद्र चौहान, थाना अध्यक्ष शेरकोट संजय कुमार पांचाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और टूटे तटबंध को ठीक कराने का प्रयास किया। एसडीएम धीरेंद्र सिंह ने बताया कि देर रात तक सिंचाई विभाग और निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने जेसीबी के माध्यम से टूटे बंधे को ठीक करा दिया। अधिकारियों को तटबंध की निगरानी की हिदायत दी।
उधर दहशतजदा ग्रामवासियों ने शनिवार रात जागकर बिताई। ग्रामवासियों नीशू, महावीर सिंह, मदन सिंह ने बताया कि उन्हें रात भर यह चिंता सताती रही कि बंधा कहीं फिर से न टूट जाए। नदी में पानी कम होने से लोगों ने राहत महसूस की। नायब तहसीलदार परमानंद श्रीवास्तव ने राजस्व विभाग की टीम के साथ दौरा किया और ग्रामीणों को भरोसा दिया कि समस्या का स्थाई तौर निदान कराने का प्रयास होगा।
2010 में तटबंध टूटने से आई भी भयंकर बाढ़
ग्रामीणों ने बताया कि 2010 में रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण तटबंध टूटने से हाईवे ध्वस्त हो गया था। सैकड़ों लोगों के मकान जमींदोज हो गए थे और फसलें बर्बाद हो गई थी। बाद में जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों के काफिले के साथ पहुंचकर अफसोस जताया था। भरोसा दिया था कि उनकी परेशानी का स्थाई समाधान कराने का प्रयास होगा लेकिन अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठै रहे।
मरम्मत के बाद रामगंगा नदी का तटबंध।- फोटो : DHAMPUR